Monday, 28 January 2019

जादूई चक्की

जादूई  चक्की
एक गांव में दो भाई रहते थे। बड़ा भाई बहुत अमीर था और छोटा भाई बहुत गरीब। बड़े भाई के घर में सभी प्रकार की सुविधाएँ और धन-दौलत सब थी परंतु छोटे भाई के पास खाने के लिए चावल तक नहीं था। बड़े भाई का जीवन बहुत ही सुंदर तरीके से गुज़र रहा था परंतु छोटा भाई बहुत ही दुख कष्ट सह कर अपना गुज़ारा कर रहा था।
दीपावली का त्यौहार आया, बड़ा भाई अपने परिवार के साथ ख़ुशियाँ मना रहा था तो दूसरी तरफ़ छोटे भाई के घर में खाने तक को कुछ नहीं था। छोटे भाई के बच्चे भूख के मारे रो रहे थे। अपने बच्चों का रोना देखकर छोटे भाई को सहन नहीं हुआ और वह अपने बड़े भाई के घर कुछ अनाज मांगने के लिए चला गया ताकि उसके बच्चों को भोजन मिल सके।
वहां उसने अपने बड़े भाई से कहा :-"प्यारे भैया ,आज त्योहार का दिन  है पर घर में खाने के लिए एक चावल का दाना भी नहीं है कृपया कुछ अनाज देने की कृपा करे ताकि मैं  अपने परिवार का पेट भर सकू। "
परंतु उसने छोटे भाई का अपमान करके उसे वापस भेज दिया। छोटा भाई बहुत निराश होकर रोते-रोते अपने घर को लौट रहा था तभी उसको रास्ते में एक बूढ़े व्यक्ति ने रोका जिसके सामने एक लकड़ियों का गट्ठर पड़ा हुआ था। उसने छोटे भाई से कहा :- –  आज त्योहार का ख़ुशी का दिन है तुम इस प्रकार क्यों रो रहे हो ,बोलो  बेटा तुम क्यों रो रहे हो? सहानुभूति के शब्द सुन उस छोटे भाई ने अपने बड़े भाई के दुर्व्यवहार के बारे में उस  आदमी को सब कुछ बताया।
 उस बूढ़े व्यक्ति ने छोटे भाई को कहा:- देखो निराश न हो अगर तुम  मेरा  यह लकड़ियों का गट्ठर मेरे घर तक पहुंचा दोगे ,तो मैं तुम्हें एक ऐसा रास्ता बताऊंगा जिससे की तुम बहुत अमीर बन जाओगे।"
 छोटा भाई मान गया और उसने लकड़ियों का गट्ठर उठाया और उसे लेकर बूढ़े व्यक्ति के घर पर पहुंचा दिया। पहुंचाने के बाद उस बूढ़े व्यक्ति ने उसे एक मालपुआ दिया और कहा: –  "तुम पास के जंगल में पश्चिमी दिशा में जाओ वहां तुम को एक गुफा दिखेगी , उस गुफा में घुसने के बाद तुम्हें कुछ बोने लोग मिलेंगे।
उन बोनों को मालपूआ बहुत पसंद है ,वह मालपुआ के बदले तुम्हें कुछ भी देने को राज़ी हो जाएंगे। उन्हें मालपुआ के बदले जादुई चक्की माँगना।"
 गरीब भाई ने उस बूढ़े की बात को मान लिया  और वह उस गुफा में पहुंचा। वहां उस गरीब भाई ने तीन  बोने व्यक्तियों को देखा ,उनमें से एक बोने ने उस गरीब भाई को कहा:-सुनो मित्र तुम यहाँ कैसे ? क्या तुम यह मालपुआ मुझे दोगे , मैं तुम्हें इस मालपुआ के बदले कुछ भी दे सकता हूं।
छोटे भाई ने कहा :- हाँ मालपुआ तो मई दे डोंगा पर बदले में मुझे जादुई चक्की चाहिए,क्या आप मुझे देंगे ?
उस बोने व्यक्ति ने कहां-  :-हाँ अवश्य पर याद रखना ये जादुई है और इसके कुछ नियम है जो गौर से सुनो , तुम्हें जो भी चाहिए तुम इससे मांग सकते हो। जब भी तुम्हें किसी चीज़ की जरूरत हो तो चक्की को घुमाना और मांग लेना। जब भी तुम चक्की को बंद करना चाहो उसके ऊपर एक लाल कपड़ा डाल देना, चक्की बंद हो जायगी।,समझे."
भाई ने जादुई चक्की ले ली और बोने  का धन्यवाद कर  घर वापस आ गया।
घर पहुंचने के बाद  उस गरीब भाई ने चक्की घुमाते हुए सबसे पहले कहा: –  चक्की-चक्की चावल दे? तभी चक्की ने जादू से ढेर सारा चावल उनके सामने निकाल कर डाल दिया। उसके बाद उसने चक्की से दाल निकाला। गरीब भाई के परिवार ने उस दिन पेट भर के खाना खाया और सब सो गए सब सो गए। बचे खुचे चावल, दाल और अन्य अनाज को लेकर गरीब भाई सवेरे बाज़ार में गया। बाज़ार में अच्छे मूल्य में उसने उन अनाजों को बेच दिया। चक्की की मदद से वह हर दिन कुछ ना कुछ अनाज बनाता और बाजार बेचने जाया करता था। धीरे-धीरे वह अपने बड़े भाई से भी ज्यादा अमीर बन गया।
बड़ा भाई छोटे भाई की अमीरी से जलने लगा और वह सोचने लगा कि – जो कुछ दिनों पहले मुझसे खाने के लिए भीख मांगने आया था वह आज अचानक कैसे अमीर बन गया? छोटे भाई की असलियत जानने के लिए एक दिन वह चोरी चुपके छोटे भाई के घर गया। जब उसने चक्की से अनाज निकलते हुए देखा तो वह चौक गया और दूसरे दिन जब छोटे भाई के घर पर कोई नहीं था तो उसने चक्की को चुरा लिया और वह अपने परिवार के साथ नाव में बैठकर एक दूसरे राज्य की ओर निकल पड़ा।
 बड़े भाई की पत्नी बहुत चिंतित थी की आखिर इस साधारण से चक्की में ऐसा क्या है कि मेरा पति पूरा घर बार छोड़कर इस चक्की को लेकर दूसरे देश जाने की सोच रहा है। नाव पर ही पत्नी ने उस चक्की के विषय में पूछा – तो उसके पति ने चक्की के विषय में सब कुछ बताया और चक्की को उसी समय घूमा कर आदेश दिया – चक्की-चक्की चावल बना। बस फिर क्या था चक्की चावल बनाने लगा, चावल इतना ज्यादा हो गया की नाव पानी में डूब गया और बड़ा भाई और उसका परिवार सब पानी में डूब कर मर गए। बड़े भाई को चक्की शुरू करना तो देखा था परंतु उससे बंद करने का तरीका नहीं पता था। यही उसके अंत का कारण बना।

Saturday, 26 January 2019

थंबलीना

बहुत समय पहले की बात है. एक स्त्री बिलकुल  अकेली रहती थी, उसकी कोई भी संतान नहीं थी. वो बेहद निराश और दुखी हो गई थी , एक रोज़ वो एक परी के पास गई. उस परी ने उसे एक बीज दिया और कहा घर जाकर इसे गमले में लगा देना. उस महिला ने वैसा ही किया. जब वो सुबह सोकर उठी, तो उस बीज में से सुंदर जादुई फूल- टूलिप उग चुका था. टूलिप की एक पंखुड़ी अधखुली थी. उस महिला ने उस पंखुड़ी को चूमा तो वो पूरी तरह खुल गई और उसमें से एक बेहद सुंदर और प्यारी से लड़की निकली. वो लड़की बहुत ही नाज़ुक थी, एकदम फूल की तरह और वो इतनी छोटी थी कि उस महिला ने उसका नाम थंबलीना रख दिया, क्योंकि वो अंगूठे के आकार जितनी ही थी. उस महिला ने कहा कि मैं तुम्हारी मां हूं और तुम्हें बहुत प्यार से रखूंगी. थंबलीना भी बेहद ख़ुश थी. वो फूलों के बिस्तर पर सोती और उसकी मां उसका बहुत ख़्याल रखती.
 एक रोज़ वो खेल रही थी, तो एक मेंढक की नज़र उस पर पड़ी. उसने सोचा, यह लड़की तो बहुत ही सुंदर है. मैं अपने बेटे की शादी इससे करवाऊंगा. वो थंबलीना को उठाकर ले गया. उसे देख मेंढक का बदसूरत लड़का बहुत ख़ुश हुआ, थंबलीना को उन्होंने पास के तालाब के एक पत्ते पर रख दिया, जहां से वो चाहकर भी भाग नहीं सकती थी और ख़ुद शादी की तैयारियो में जुट गए.
थबलीना रोने लगी कि तभी एक तितली की नज़र उस पर पड़ी, तो उसने उसे उठाकर फूलों के शहर में छोड़ दिया. तितली थंबलीना के लिए कुछ खाने का इंतज़ाम करने गई थी और इतने में ही एक काले झिंगुर ने उसे देखा और उसकी ख़ूबसूरती पर फ़िदा हो गया. लेकिन थंबलीना ने उसे कहा कि हमलोग बहुत ही अलग प्राणी है, झिंगुर के दोस्तों ने भी कहा कि ये तो बहुत ही अजीब है, ये हमारी तरह सुंदर नहीं है, तो उन्होंने थंबलीना को छोड़ दिया. थंबलीना घर जाने का रास्ता ढूंढ़ रही थी और जंगल में भटकते-भटकते वो एक बिल के पास पहुंची. बिल की माल्किन एक बूढ़ी चुहिया थी.
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उस चुहिया ने थंबलीना को आसरा दिया, लेकिन बदले में उसे घर के सारे काम करने को कहा. साथ ही एक और शर्त रखी कि चाय के समय थंबलीना को उसे और उसके पड़ोसी चूहे मिस्टर मोल को कहानी भी सुनानी होगी. इतने में ही वो पड़ोसी चूहा मिस्टर मोल आया और उसने थंबलीना को देखा. थंबलीना पर उसका दिल आ गया. मिस्टर मोल ने बूढ़ी चुहिया को कहा कि उन्हें एक नया घर देखने चलना है, तो वो थंबलीना को भी साथ लेकर चल दिए. रास्ते में थंबलीना ने देखा कि एक चिड़िया घायल अवस्था में बेहोश पड़ी है. थंबलीना ने उसकी मदद करनी चाही, तो दोनों चूहों ने कहा कि इसे मरने दो, इसकी क्या मदद करोगी. पर थंबलीना का दिल न माना. उसने चिड़िया को खाना खिलाया, पानी पिलाया. उसके घाव पर वो रोज़ मरहम लगाती. एक दिन मिस्टर मोल ने अपने दिल की बात बूढ़ी चुहिया को कही कि वो थंबलीना से शादी करना चाहता है, तो वो बेहद ख़ुश हुई.
थंबलीना को जब यह बात पता चली, तो उसने साफ़ इंकार कर दिया, लेकिन चुहिया न मानी, तब थंबलीना ने कहा कि ठीक है, लेकिन एक आख़िरी बार मुझे उस घायल चिड़िया से मिलना है. थंबलीना जब वहां गई, तो उसने देखा वो चिड़िया ठीक हो चुकी है और आसमान में उड़ रही है. चिड़िया ने थंबलीना से कहा कि वो जल्दी से उसकी पीठ पर बैठ जाए, ताकि वो उसे यहां से दूर ले जा सके. थंबलीना ने वैसा ही किया.
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चिड़िया उसे दूर फूलों के देश में ले आई. थंबलीना ने देखा कि वहां एक सुंदर-सा राजकुमार है. राजकुमार ने भी थंबलीना को देखा, तो देखते ही उस पर मुग्ध हो गया. थंबलीना को भी राजकुमार से पहली नज़र में प्यार हो गया. राजकुमार बड़े ही अदब से थंबलीना के पास आया और अपना परिचय दिया कि मैं इस फूलों के देश का राजकुमार हूं, क्या तुम मेरी रानी बनोगी…? थंबलीना शरमा गई और उसे फूलों के देश की ओर से पंख भी मिल गए, जिससे वो राजकुमार के साथ यहां-वहां उड़कर सैर पर जा सके. दोनों ख़ुशी-ख़ुशी रहने लगे.
सीख: कर भला, हो भला… थंबलीना का मन बहुत ही भावुक और प्यारा था, इसलिए इतनी परेशानियों के बावजूद वो अपने मुकाम तक पहुंची. उसने दूसरों की मदद की, तो बदले में उसे भी मदद मिली. साथ ही उसने अपनी बहादुरी और समझदारी नहीं छोड़ी.