Wednesday, 8 July 2020

धैर्य

चारो तरफ बर्फ की गहरी चादर फैली हुयी थी ,लोग अपनी अपनी रजाइयों में दुबके खुद को गर्म रखने का प्रयास कर रहे थे ,पर  ओलिविआ अपने छोटे से बर्फ के घर में अपनी माँ के आग  जलाने के अथक परिश्रम को अपलक देख रही थी ,माँ के चेहरे पर नीद और आग के ना जल पाने के कारण  गहन उदासी की रेखाएं दिख रही थी ,ओलिविआ को पता था की अगर आग न जली तो शायद सुबह तक वो अपने भाई बहनो के साथ बर्फ बन जाएगी ,बर्फीली हवाओ का शोर अंदर आ रहा था , लकड़ियाँ पूरी तरह ओस से भीगी हुयी थी ,और सूखी लकड़ियाँ घर के बाहर बने सामान घर में थी ,पर इस समय बाहर निकलना मौत को दावत देना ही था , ओलिविआ का दिमाग तेज़ी से काम कर  रहा था ,इस ठंड में शिकारी जंगली बर्फानी भालू भी घरो के बाहर अपनी भूख शांत करने के लिए टोह लगाए बैठे होते है। ओलिविआ ने आग जलाने  का फैसला कर  लिया था ,माँ निढाल हो कर भाई बहनो के बीच दुबक गयी थी ,आखिरी माचिस की तीली भी जल कर खत्म हो चुकी थी ,गहन सोच में डूबी ओलिविआ को अचानक अपनी पुस्तक में पढ़ा पाठ  याद आ गया ,की किस तरह जंगल में खो जाने के कारण एक शिकारी ने लकड़ी की मदद से ही आग जला कर  खुद को जंगली जानवरो और बेतहाशा ठंड से बचाया था,ओलिविया ने बिना एक पल गवाए लकड़ी की छोटे टुकड़े को उठाया और उसके आस पास सूखे कागज़ो के टुकड़े रख लकड़ी को घिसना शुरू किया लगातार घर्षण से लकड़ी गर्म तो होने लगी थी पर ,छोटी सी ओलिविआ अब थक रही थी तभी उसकी नज़र बेलन  पर पड़ी और वो मुस्कुरा उठी उसने लकड़ी को एक धागे से बांध केर बेलन के ऊपर लपेटा और एक सिरा खिड़की के दरवाज़े पैर बांध दिया हवस खिड़की ज़ोर ज़ोर से हिल रही थी और छोटी सी लकड़ी में तेज़ी से घर्षण हो रहा था ,और ५ मिनट में ही लगातार  तेज़ घर्षण के कारण लकड़ी में धुआँ निकलने लगा और फिर आग की लपट उठी और कागज़ जलने लगे ,ओलिविआ ने आग के चारो तरफ और कागज़ रख दिए और साड़ी लकडियाँ  भी ,५ मिनट में ही लकड़ियाँ सुख गयी और ओलिविया ने चूल्हे में बढ़िया तेज़ आग जला दी ,पूरा घर गर्म हो    चुका था ,सब आराम से सो रहे थे ,माँ के चेहरा पे मुस्कान थी ,ओलिविया ने उस रात अपने परिवार को अपनी तीव्र स्मरण शक्ति और आत्मबल के कारण जीवन दान दिया था। ओलिविआ ने हमे सिखाया की यदि ,मुश्किल समय पर यदि हम हिम्मत न हारे और अपनी बुद्धि और विवेक का इस्तेमाल धैर्यता से करे तो कोई भी काम असंभव नहीं है। 

shikha 

Mitra (friendship)


Mitra (friendship)

आसमान में घने काले बादल थे ,काली( चिड़िया )अपने घोसले में बैठी प्रार्थना कर  रही थी की बारिश ना आये ,जिस सूखे पेड़ पे उसने घोसला बनाया था, उस मैं इतनी पत्तिया नहीं थी की उसे और उसके छोटे छोटे बच्चो को पानी से बचा सके ,अभी वो सोच ही रही थी की तेज़ बारिश शुरू हो गयी और काली तेज़ी से घोसले में बैठे हुए डरे हुए बच्चों को अपने पंखो में छिपा कर बैठ गयी ,पास ही एक घना पीपल का पेड़ था जिस पर हज़ारो पक्षियों का ठिकाना था ,चिड़िया ने सोचा अपने मित्रो से बारिश के मौसम के लिए ठिकाना मांग लेती हूँ ,और चिड़िया उड़ कर पीपल के पेड़ पर पहुंची। काली : मेरी प्यारी सखियों तुमने हमेशा ही मेरी मदद करी है ,आज मैं  बहुत कष्ट में हु इस तेज़ बारिश में मेरे बच्चो को सर छुपाने के लिए जगह चाहिए ,जिस सूखे पेड़ पर मेरा घोसला है उसमे पत्तिया न होने के कारण वो हमे तेज़ पानी से बचा पाने में असमर्थ है ,क्या कुछ समय मैं यहाँ तुम्हारे पास अपने बच्चो को ले कर आश्रय पा  सकती हूँ ?सभी चिड़िया एक स्वर में चिल्लाने लगी सभी चिड़ियाँ :नहीं नहीं हम तो खुद ही अपने घोसलो में मुश्किल से रहते है ,यहाँ जगह मिलना मुश्किल है ,तुम कही और जाओ या वही रहो हम तुम्हारी मदद नहीं कर सकते। काली समझ चुकी थी की उसकी सहेलियाँ उसकी सच्ची मित्र नहीं ,और वह दुखी मन से वह से चली गयी कुछ दूर एक चूहा पानी में फंसा हुआ था ,अपनी परेशानी भूल काली उससे अपने घोसले में ले आयी और उससे खा की जब तक बारिश है वो वह रह सकता है। तभी ज़ोर से बिजली गिरने की आवाज़ आयी ,घने पीपल के पेड़ पर बिजली गिरी थी लाखो चिड़ियों के घर जल गए और लाखो चिड़िया मारी भी गयी ,अब वो आश्रय की खोज में लगी थी पर काली अपने घोसले में आराम से थी। कुछ दिनों के बाद शिकारी ने जाल लगाया बेघर चिड़िया खाने के लालच में जाल में फंस गयी ,काली भी खाने की खोज में निकली हुयी थी ,अपने मित्रो को जाल में फंसा देख उसने अपने मित्र चूहे से मदद मांगी. काली:भाई चूहे दया कर के मेरे मित्रो को जाल से मुक्त करो चूहा :मगर काली इन मित्रो ने तुम्हे जरुरत के समय साथ नहीं दिया था काली:मित्र चूहे शायद मई इनकी मित्र नहीं ,पर ये सभी मेरी मित्र है चूहा :काली तुम  धन्य हो,(और जाल अपने तेज़ दांतो की मदद से काट  दिया)सभी चिड़ियाँ मुक्त हो गयी और काली से क्षमा मांगने लगी काली ने सबको क्षमा कर दिया और हमेशा के लिए मित्रता का पथ सबको सीखा दिया ,. 



shikha 

Tuesday, 7 July 2020

नन्ही भेड़ की जीत


नन्ही भेड़  की जीत 
नमस्ते मेरे प्यारे नन्हे मुन्नो कहानियो की दुनिया में तुम सबका स्वागत चलो आज तुम्हे ले चलती हूँ मीनू भेड़  और  शेर का उपहार की महफ़िल में  ,बात है तो बड़ी अजीब पर बड़ी मज़ेदार, चलो तो फिर शुरू करते है

एक जंगल में शेर का राज था ,उसे जंगल में तरह तरह की प्रतियोगिताये करवाने का बहुत शौक था ,आज उसने जंगल में नाच गाने प्रतियोगिता रखी थी ,सभी जानवर बहुत उत्साहित थे ,और अपनी - अपनी प्रस्तुति का मन लगा कर अभ्यास कर रहे थे ,शेर राजा ने पास के जंगल से नदी की राजा मगरमच्छ राज़ को मुख्य अतिथि की रूप में बुलाया था,कई गुप्त उपहार भी मिलने वाले थे.
आखिर समय आ ही गया और सभी लोग नाच के लिए बनाये गए मंच के चारो ओर इकटठे हो गए ,
शेर ने मंच पर आ कर कहा (lion voice)
"प्यारे मित्रो ,बहुत इंतज़ार के बाद अब ये समय आ पंहुचा है ,आप सभी अपनी प्रतिभाओ की परीक्षा देने को त्यार हो जाए ,एक के बाद एक सभी अपनी खूबियों की प्रस्तुति करेंगे और दूर जंगल से आये राजा मगरमच्छ राज़ ये निश्चित करेंगे की जंगल में सर्वश्रेष्ठ का उपहार किसे मिले "
सभी ने तालिया बजायी और प्रतियोगिता शुरू हो गयी।
पहले आया बंदर और उसने तरह तरह की कलाबाज़ियां दिखाई और लोगो को मूमफली खाने के फायदे बताये और एक कविता सुना के चला गया ,सब खूब हसे और तालिया बजायी।
अब हाथी  आया और बोला  (elephant voice)
दोस्तों मैं आपको cat walk कर के दिखाऊंगा ,और अपनी मोटी  कमर के साथ ठुमक ठुमक कर चलने लगा सब खूब हसे और तालिया बजायी।
फिर उसने अपनी सूंड में पानी भर कर मगरमच्छ का अभिवादन किया
इसी तरह हरी तोते ने गाना सुनाया (parrot voice)
"स्गवात है मेहमान प्यारे  हमारे ,खाके देखो मिर्ची और कभी मीठे पारे
अभिवादन करते है हम सब तोते तुम्हारे "
खूब तालिया बजी मगरमच्छ ने भी खूब ताली बजायी अब आया नाच का समय बिल्ली ,गाय ,बकरी और भेड़ इस प्रतियोगिता की प्रमुख भागिदार थी
पहले आयी बिल्ली और घमंड से गाने लगी  (cat voice):
 "म्याऊ म्याऊ कमर हिलाऊ
मैं हूँ सबसे बड़ी नर्तकी तुम सबको समझाऊ "
गाने पर खूब डांस किया पर अचानक पैर मुड़  जाने के कारण गिर पड़ी ,और प्रतियोगिता से बाहर हो गयी।
फिर आयी गाय (cow voice)
"सबको स्वस्थ बनाती हूँ ,हरी घास मैं खाती हूँ ,
इतना ही अरमान मेरा ,सबके प्यार की प्यासी हूँ ,
मैं हूँ प्रबल नर्तकी इस इनाम की जिज्ञासी   हूँ  "
गाने पर इतरा इतरा के डांस किया पर कुछ ही मिनट में थक कर स्टेज पर ही बैठ गयी
अब आयी बकरी की बारी (goat voice)
"मैं मई मई मई ये है मेरा गीत ,हरी घास से मेरी प्रीत
मुझको काट के खाना ना जीवन  मेरा है सपना
ये इनाम सिर्फ है  मेरा ,ये इनाम ही मेरा मीत  "
ये गाना गाते हुए जैसे ही नाचने को कदम उठाया मगरमच्छ की लालच से भरी नज़र देख कर तुरंत वह से भाग गयी।
अब बची हमारी प्यारी सी नन्ही सी भेड़ जिसे नाचना नहीं आता था ,पर मन में ढेरो उमंग लिए स्टेज पर आ गयी ,चारो तरफ खतरनाक जानवर उसे देख रहे थे ,पर वो घबराई नहीं और उसने गाना शुरू किया
(sheep  voice )
"मैं नन्ही सी ,मैं छोटी सी पर मैं हूँ ,धनवान बड़ी
हिम्मत पे बहुत नाज़ है ,दिल से हूँ बलवान बड़ी
आज ठुमक के नाच रही ना समझो हूँ नादान बड़ी
मैं जीतू या तुम जीतो मुझको सबकी जीत बड़ी "
और धीरे धीरे दो पैरो पर खड़े हो कर सभी को नमस्कार कर के चली गयी ,
बहुत देर तक तालिया बजती रही
और मगरमच्छ ने भेड़ के डांस को सर्वसमत्ति  से सर्वश्रेस्ठ नर्तकी का पुरस्कार दिया ,और बाकी सभी को तरह तरह की पुरस्कार दिए। सभी के दिल में नन्ही भेड़  के लिए प्यार  और इज़्ज़त बढ़ गये।
तो प्यारे बच्चो अगर हम किसी प्रकार की भी परिस्थिति में अपनी सहजता और उदारता नहीं छोड़ते और हिम्मत से काम कर सब के मंगल की कामना करते है तो ,हमेशा ही हमको सबका प्यार मिलता। इसलिए हमे अपने साथ सभी के भले के बारे में सोचना चाहिए।







जादूई घोडा  और राजकुमारी 

एक समय  की बात है ,एक नगर में एक राजा रहा करता था वह अपनी पत्नी को बहुत प्यार करता था ,किन्तु कुछ समय बाद रानी ने एक राजकुमारी को जन्म दिया और बच्चे को जन्म देते समय रानी की मृत्यु हो गयी ,
अब राजा राजकुमार के साथ अकेला रह गया वो राजकुमारी को बहुत प्यार करता ,पुरे दिन उसका ध्यान रखता ,पर राज काज के कामो में कई बार वो राजकुमारी का ध्यान नहीं रख पाता ,.सो ना चाहते हुए भी उन्होंने ने दूसरा विवाह करने का निर्णय लिया ,और शीघ्र ही एक विधवा जिसकी एक बेटी थी से विवाह कर लिया और राजकुमारी की दूसरी माँ के रूप में महल में ले आये ,.
 राजकुमारी बहुत ही रूपवान थी ,और सभी की लाड़ली भी थी इसलिए राजा से ले के प्रजा तक राजकुमारी को बहुत प्यार करते पर दूसरी रानी और उसकी बेटी को ये एक आँख नहीं भाता ,पर राजा के कारण वो राजकुमारी को कोई नुक्सान नहीं पंहुचा पाते।
एक बार राजा को एक युद्ध के सिलसिले में नगर से बहार जाना पड़ा ,और राजा के शहर छोड़ते ही दूसरी रानी और उसकी बेटी ने राजकुमारी को एक कमरे में बंद कर दिया और उसे खाना पीना देना सब बंद कर दिया ,और कुछ दिनों के बाद राजकुमारी को राजा के पशुओ को घास चराने के काम पर लगा दिया ,बेचारी नाज़ुक सी राजकुमारी रोज़ घनी धूप में पशुओ को ले घास चराने ले जाती और रात गए वापस आती ,खाने के नाम पर भी उसे कुछ नहीं दिया जाता ,रराजकुमारी पशुओ की देखभाल मन लगा कर करती और पूरे समय रोती  रहती ,
पशुओ के इस झुण्ड में एक बैगनी रंग का घोडा भी था ,जो रोज़ राजकुमारी को रोते  देखता ,और दुखी हो जाता ,
एक दिन जब राजकुमारी रो रही थी तो घोडा राजकुमारी के पास आया और बोला  प्यारी राजकुमारी आखिर तुम क्यों रो रही हो?तुम्हे अपनी दूसरी माँ के बारे में सोच कर दुखी नहीं होना चाहिए ,पर अगर तुम भूख के कारन रो रही हो तो प्रिय राजकुमारी मेरे गर्दन के बालो में एक बाल तोड़ कर जमीन पर रखो और जो चाहो खाने को मांगो तुम्हे सब मिलेगा  ,भूखी और कमज़ोर राजकुमारी ने ऐसा ही किया और बाल जमीन पर रखते ही चारो तरफ तरह  तरह के खाने की चीज़े आ गयी , और राजकुमारी ने पेट भर खाना खाया रोज़ भर पेट खाना मिलने के कारण राजकुमारी फिर से बहुत खूबसूरत और कोमल हो गयी ,दूसरी रानी को बड़ी हैरानी हुयी जब  उसने देखा की राजकुमारी बिना भरपेट भोजन के भी इतनी सुंदर और स्वस्थ कैसे हो रही है,उसने अपनी एक सेविका को राजकुमारी के पीछे भेज दिया ,और सेविका ने सारी बात दूसरी रानी को बता दी ,कुछ दिनों में राजा वापस आ गया सब बहुत खुश हुए पर दूसरी रानी वह नहीं आयी ,उसने राज वैध को धमका कर कहा की तुम राजा को कहो की बैगनी रंग के घोड़े का मांस खाने से ही मेरी बिमारी दूर होगी वरना मैं  मर जाउंगी ,राज वैध ने ऐसा ही किया
 राजकुमारी ने ये साड़ी बात सुन ली और बैगनी घोड़े को ये सारी  बात बता दी,और कहा मैं जानती हूँ एक न एक दिन दूसरी रानी मुझे भी मार देगी तुम्हे मेरा बहुत साथ दिया है ,मैं  तुम्हारे साथ ये राज्य छोड़ देना चाहती हूँ और बैगनी घोड़े की पीठ पर बैठ कर वहा से चली गयी।
बैगनी घोडा राजकुमारी को ले जंगल की तरफ भागता चला गया ,एक शेर ने राजकुमारी पर हमला कर दिया ,पर घोड़े ने जम कर मुक़ाबला किया और राजकुमारी को बचा लिया ,घोडा बहुत घायल हो गया था सो राजकुमारी ने उसकी बहुत सेवा की राजकुमारी की कड़ी सेवा ,और घोड़े का राजकुमारी के लिए जान की बाज़ी लगा देना ,एक परी देखा करती थी ,उसने घोड़े को पहचान लिया  वो परी देश का राजकुमार था ,जो वहां  की रानी के  शाप से घोडा बन  गया था,इसलिए उसे वापस  एक खूबसूरत राजकुमार में बदल दिया ,और राजकुमारी और उस राजकुमार का विवाह कर दिया।
राजकुमारी वापस अपने महल गयी तो देखा की दूसरी रानी ने राजा को कैद कर लिया था ,सो राजकुमारी ने सारी  प्रजा और राजकुमार के साथ मिल कर महल पर हमला कर दिया और राजा को बचा लिया और दूसरी रानी और उसकी बेटी को क़ैद कर लिया ,और सब आराम से रहने लगे।



री




 जादुई बीन

वैभव का नाम वैभव जरूर था पर  वह एक छोटे से गांव बड़ी ही गरीबी का जीवन बीता  रहा था ,चौबीस घंटे काम करने के बावजूद बड़ी मुश्किल से वह अपने और अपने माता पिता के लिए पेट भरने योग्य धन कमा पाता ,एक बार जब वह घर के लिए लकडिया काटने के लिए जंगल की और जा रहा था तो उसने देखा पहाड़ के पीछे बने सरोवर में बहुत से कमल के फूल खिले हुए है और ,एक लड़की वही पर बैठ कर बीन बाज़ा रही है और चारो तरफ से तरह तरह के सांप बहार निकल कर बीन की आवाज़ पर नाच रहे है और उस लड़की को ज़रा सा भी डर  नहीं लग रहा ,वैभव ने सोचा मैं ही जा कर लड़की को बचा लेता हूँ वरना  कोई ना कोई सांप उसे जरूर काट लेगा। और जल्दी जल्दी पहाड़ की उस ओर जाने लगा ,और जैसे ही लड़की के नज़दीक पंहुचा सारे सांप गायब हो गए और वैभव ने देखा लड़की के बड़े ही सुंदर पंख थे जिस द्वारा लड़की  भी तुरंत ही आसमान में उड़ कर ओझल हो गयी ,पर लड़की की बीन वही छूट गयी ,
वैभव ने सोचा अगर बीन यही छोड़ दू तो आधी पानी बरसात मे जरूर खराब हो जाएगी इसलिए वो बीन और काटी हुयी लकडिया ले कर घर आ गया। और बीन को भी लकड़ियों के साथ रख थका हारा खाना खा कर सोने चला गया आधी रात को बीन की अव्वाज़ से उसकी आँख खुली तो व हैरान हो गया ,उसी के घर वह लड़की फिर से बीन बाज़ा रही थी और सभी सांप आस पास नाच रहे थे ,तभी उसकी नज़र पास ही रखे लड़की के पंखो पर पड़ी उसने चुपचाप पंखो को छुपा दिया। कुछ देर बीन बजाने के बाद लड़की ने सांपो को इशारा किया सब चले गए और लड़की भी जाने के लिए अपने पंख खोजने लगी पंख ना मिलने पर वह ज़ोर ज़ोर से रोने लगी ,ये देख कर वैभव तुरंत बाहर आया और उससे रोने का कारन पूछने लगा परी बलि मैं नाग परी हूँ मेरा काम है रोज़ बीन बाज़ा कर सांपो का मनोरंजन करना और वापस परी लोक जाना यदि मैं एक दिन भी नहीं गयी तो ये सभी सांप मुझे डस लेंगे वैभव ने तुरंत परी के पंख वापस कर दिए पारी ने वैभव को आशीर्वाद दिया और कहा देखो वैभव तुम बहुत दयालु हो आज के बाद मैं रोज़ यहाँ बीन बजाऊंगी और बदले में तुम्हे एक सोने की मोहर दूंगी और तुम्हे ये राज़ अपने तक ही रखना होगा और तुम्हे और तुहरे परिवार को ,कभी सांपो से दर नहीं होगा वैभव के हाथ पर मोहर रख कर चली गयी।
वैभव ने सुबह ही मोहर अच्छे दामों में बेच दी धीरे धीरे मोहरे बेच कर वैभव आराम से जिंदगी बिताने लगा ,और पुरे दिन बिना मेहनत उसे मोहर मिल जाती जिसे वो बेच देता ,पर  उसने अपनी कसम कभी नहीं तोड़ी और परी  जहा बीन बजती उस जगह को दीवार से घेरवा दिया ताकि कोई देख न सके और दूसरी तरफ रहने लगा  उसने किसी को परी और बीन का राज़ नहीं बताया , बहुत सालो के बाद एक दिन जब वैभव अपने घर ना था तो पत्नी को रात में बीन की आवाज़ आयी और वह उस  तरफ चली गयी जहा जाना वैभव ने मना किया था, उसकी पत्नी ने जब इतनी सूंदर स्त्री  को बीन बजाते देखा तो वह बहुत दर गयी ,उसने सोचा इतनी सुंदर स्त्री को यदि मेरे पति  ने पसंद किया तो मेरा क्या होगा , जरूर इस बीन के कारन ये यहाँ आयी है मैं इस बीन को ही जला देती हूँ  ,और बिना कुछ सोचे समझे बीन को जलाने लगी  बीन के जलाने की कोशिश करते  ही चारो तरफ से सांप निकलने लगे और उन्होंने वैभव की पत्नी को डस लिया ,और बीन को वापस उसकी जगह रख दिया और चले गए ,वैभव घर आया तो अपनी पत्नी को ऐसी हालत में देख रोने लगा और बीन बजाने लगा ,तुरंत परी वह आ गयी और उसने वैभव की पत्नी  को तो ठीक कर दिया पर हमेशा के लिए वैभव के घर से बीन के साथ चली गयी।
और वैभव फिर से पुराना  जीवन बिताने लगा।

धैर्य


  

हिरण की युक्तियाँ और सियार की हार


हिरण की युक्तियाँ और सियार की हार 

एक पहाड़ के किनारे एक  घना जंगल था। जंगल में कई तरह के जानवर रहते थे। एक दिन एक हिरण अपने दो बच्चो  के साथ घास खा रहा था। और बच्चे खुली हवा में  इधर-उधर खुशी से घूम रहे थे ।घूमते घूमते वे एक गुफा में घुस गए,उन्हें अंदर जाते देख हिरन भी अंदर आ गया ,अंदर जाते ही उसे  मालूम हुआ की ये एक शेर  की गुफा थी। गुफा के चारों ओर मरे हुए  जानवरों की हड्डियाँ थीं।हिरण बहुत डर गया पर भाग्य से, उस समय शेर गुफा के अंदर नहीं था।हिरण ने सोचा वे जल्दी से अपने बच्चो को ले कर वापस निकल जाए,वो अपने बच्चो  को गुफा से बाहर ले जाने की कोशिश कर ही रहा था की उसी  समय उसने एक तेज़ गुर्राने की आवाज़  सुनी। उसने देखा शेर कुछ दूरी पर ही था और गुफा की तरफ आ रहा था। अब गुफा से बाहर जाना खतरनाक था। उसने एक योजना बनायीं ,शेर गुफा के काफी  करीब आ गया था। हिरण ने अपनी आवाज़ को बहुत ऊँचा किया और चिल्लाया, “मेरे प्यारे छोटे  बच्चों  रोते नहीं हैं। हम मांसाहारी  है मुझे पता है तुम्हे शेर का मॉस पसंद है ,मैं तुम्हें खाने के लिए अभी ही एक शेर पकड़ कर दूंगा । तुम आज स्वादिष्ट भोजन करना ,पहले भी मैंने शेर की गुफा में घुस कर कितने शेर तुम्हे दिए है, शांत रहो वरना  शेर भाग जायेगा । ”
शेर  ने ये शब्द सुने तो  वह परेशान हो गया और दर कर  उसने खुद से कहा, “गुफा से वह अजीब आवाज किसकी है? मुझे पकड़ने के लिए कोई  खतरनाक जानवर अंदर घाट लगाए बैठा है ,बेहतर है मैं समय रहते ही यहाँ से भाग जाऊ। "
और ज़ोर से वापस भागने लगा ,उसे भागते देख गीदड़ बड़ा हैरान हुआ उसने शेर से पूछा  " हे जंगल राज़ आप इस तरह  डर से क्यों भाग रहे हैं?"शेर : ने कहा, "मेरे प्यारे गीदड़ , एक शक्तिशाली और भयंकर जानवर मेरी गुफा में रहने आया है। उसके बच्चो को शेर का मॉस अति प्रिय है वो  खाने के लिए शेर मांग रहे हैं। और उनके पिता ने उन्हें शेर देने का वडा किया है पहले भी वो कई शेर खा चुके है। " गीदड़ बहुत चालाक था ,वह समझ गया की जंगल में शेर को खाने वाला कोई भी जीव नहीं है ,और कोई जरूर शेर को मुर्ख बना रहा है ,तो वो बोलै चलिए मैं देखता हूँ और आपकी मदद करता हूँ ।लेकिन शेर ने कहा, “मैं कोई  मौका नहीं लेना चाहता। वो तो बस शेर को ही खाना चाहते है, मुझे मरने के लिए अकेला छोड़ तुम तो बच जाओगे और  मैं मारा जाऊँगा । इसलिए मैं तुम्हारे  साथ नहीं आऊंगा। "गीदड़ ने कहा, “मुझ पर विश्वास रखिये राजन ।  हम दोनों  अपनी पूंछ को एक साथ बाँध लेते है । फिर तो विश्वास हो जायेगा की मैं आपको छोड़ कर नहीं जा पाऊंगा। ”शेर गीदड़ की इस सलाह पर बेमन से मान गया। सियार ने उनकी पूंछ और अपनी पूंछ में एक पक्की गाँठ बाँध ली। और दोनों  एक साथ गुफा की ओर चले पड़े ।हिरण ने दूर से ही गीदड़ और शेर को साथ आते देखा ,उसे गीदड़ की छलकी समझ आ गयी,उसने फिर बूढी लगायी और  ,वो फिर अव्वाज़ को उठा कर ज़ोर से चिल्लाया “मेरे प्यारे बच्चों, मैंने अपने दोस्त, चतुर गीदड़ से, हमारे लिए एक शेर को पकड़ने के लिए प्रार्थना कि था। अब देखो गीदड़ ने हमारे लिए एक शेर पकड़ लिया है। और उसने शेर की पूंछ को अपनी पूंछ से बांध दिया है। कितना ाचा है मेरा दोस्त ,अब तो शेर भाग भी नहीं पायेगा ,और हम आराम से स्वदिष्ट शर को खा लेंगे। "शेर  ने यह सुना, वह चौंक गया। उसे यकीन आ गया था की गीदड़  ने उसे धोखा दिया है । इसलिए, शेर ने खुद को अपनी गुफा के अंदर खड़े भयानक जानवर से बचाने का फैसला कर  लिया। और वापस  दौड़ना शुरू किया। वह गीदड़ के बारे में भूल गया।  गीदड़ शेर से बंधा बंधा चट्टानों और कांटों पर शेर के साथ खींचता हुआ जाने लगा , । बिना सोचे समझे शेर के  भागने के कारण गीदड़  दो चट्टानों के बीच फंस गया। शेर ने सोचा की खतरनाक जानवर ने उसे पकड़ लिया है सो शेर ने  अपनी सारी शक्ति लगा के गीदड़ को  साथ खींच लिया। जिससे शेर की उसकी पूंछ कट गई। और सियार मारा गया। बिना पूंछ शेर शर्म से  जंगल के दूसरे हिस्से में भाग गया।
और हिरण अपने बच्चो के साथ आराम से शेर की गुफा से बाहर निकल आया । वे अपने झुंड में सुरक्षित रूप से शामिल हो गए।

जादुई नागिन का शाप

जादुई नागिन का शाप 
मनीषा और मालिनी बहुत ही पक्की सहेलिया थी, एक बार  उनके गाँव में बहुत वर्षा हुयी पुरे गाँव में वर्षा के कारण तबाही आ गयी, जहा देखो पानी ही पानी ,दोनों के परिवार पूरी तरह से तबाह हो गए ,बची तो बस ये दोनों सखिया ,दोनों पानी के तेज़ बहाव से खुद को बचने के लिए भूखी प्यासी एक ऊँचे पेड़ पर शरण लिए हुए थी ,पेड़ पर लगे फल उनका ही नहीं बल्कि पेड़ पर आश्रय लिए हुए और भी पशु पक्षियों के पेट भरने का सहारा थे.
 दो राते ऐसे ही बीत गयी थी वर्षा थी की रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी दोनों सखियो की आँखों में नींद ना थी ,तभी मनीषा को पेड़ पर एक सांप चढ़ता हुआ दिखाई दिया ,
सांप के शरीर से इंदरधनुषी प्रकाश निकल रहा था  और सांप बहुत ही निर्बल सा लग रहा था ,इससे पहले की वो उस सांप को वहाँ से भगाने का प्रयत्न  करती ,सांप एक खूबसूरत लड़की में परिवर्तित हो गया ,
और हाथ जोड़ कर मालिनी और मनीषा से बोला : प्यारी बहनो तुम मुझसे ज़रा भी ना डरो मैं एक इच्छाधारी नागिन हूँ अधिक वर्षा के होने के कारण  अब मेरे पास रहने का कोई ठिकाना नहीं है ,वर्षा के रुकते ही मैं खुद यहाँ से चली जाउंगी ,और मेरा वादा है मैं किसी को भी कुछ नुक्सान नहीं पहुचाउंगी"
 मनीषा और मालिनी को उसकी दुर्बल आवाज़ देख कर उस पर बहुत दया आयी ,और उन्होंने उसे भीअपने पास ही जगह दे दी। धीरे धीरे सुबह हो गयी और वर्षा की रफ़्तार भी कम हो गयी ,अचनाक मालिनी का पैर  फिसला और वह सीधा पानी  तेज़ बहाव में गिर कर बहने लगी
मनीषा मदद के लिए चिल्लाने लगी:"बचाओ बचाओ"
दूर दूर तक कोई ना था की ,वह इच्छाधारी रूपी लड़की नागिन तुरंत पानी में कूद पड़ी और मालिनी को सुरक्षित बचा कर ले आयी ,पर कमज़ोरी के कारण बेहोश हो गयी ,
वर्षा रुक चुकी थी और पानी भी धीरे धीरे कम हो रहा था सो मालिनी और  मनीषा उस  नागिन रूपी लड़की को उठा कर अपने घर ले आयी और उसकी बहुत सेवा की
होश में आने के बाद कंमज़ोर नागिन ने कहा : " बहनो अभी भी मेरे लिए पानी बहुत है ,अगर आपको कष्ट ना हो तो कुछ रोज़ मैं  यहाँ रह जाऊ "
मालिनी और मनीषा मान गयी ,रात होते ही लड़की फिर नागिन के रूप में बदल गयी और उसने अपने मुँह  से एक जादुई मणि निकाली ,मणि से चमक दार प्रकाश  निकल रहा था , नहीं ने मणि से शक्ति की प्रार्थना की और उसकी शक्ति तुरंत वापस आ गयी खाने की प्रार्थना की तो खाना आ गया फिर उसने मणि को वापस मुँह में रख लिया और सो गयी.
 मालिनी और मनीषा ये सब छुप  कर देख रही थी उन्हें लगा की अगर वह लड़की के मोह से मणि निकल ले तो फिर उन्हें किसी प्रकार की कमी न होगी ,और लालच में आ कर उन्होंने सोती इच्छाधरी नागिन का सर काट  दिया और अंदर हाथ डाल कर मणि ढूढ़ने पर  उन्हें कुछ न मिला ,पर उन्होंने महसूस किया की धीरे धीरे उनके शरीर नागिन  के रूप में बदलते जा रहे है ,वे बहुत घबरा गयी तभी इच्छाधारी नागिन का शरीर एक सूंदर राजकुमारी में बदल गया ,और राजकुमारी ने कहा ये तुम्हारे लालच का फल है तुमने नागिन के विश्वास को तोडा इसलिए अब तुम्हे उसके रूप में रहना होगा क्यूंकि मुझे एक नागिन ने ये शाप दिया जिसे मैंने तुम्हारे सामान ही लालच में आ कर  मार दिया, अब जबतक कोई दूसरा तुम्हे लालच के कारण मारेगा नहीं तब तक तुम्हे ऐसे ही रहना होगा।
दोनों सखियों ने बहुत माफ़ी मांगी और धीरे धीरे वो पूरी तरह से इच्छाधारी नागिन के रूप में परिवर्तित हो गयी। और अपने लालच के कारण सजा भुगतने लगी।

परी की तपस्या

परी की तपस्या
बहुत समय पहले की बात है ,सूर्य नगर में राज्य मंदिर के पुजारी की एक बेटी थी जिसका नाम था विद्या ,विद्या नाम केव अनुरूप ही सर्व गुण  संपन्न थी ,और भगवान् की परम भक्त भी थी ,एक बार विद्या जब सूर्य को जल चढ़ा रही थी उसने देखा की दूर आसमान में एक बहुत ही खूबसूरत स्त्री उड़ती हुयी चली जा रही है ,
विद्या ने इस प्रकार उड़ती हुयी स्त्री पहले कभी नहीं देखि थी ,उसने सोचा  की मुझे इतनी विद्याये  आती है पर आज तक मुझे ये आस्मां में उड़ने की विद्या के बारे में किसी ने नहीं बताया ,और इसीलिए मैं इस विद्या में कच्ची हूँ ,और किसी भी तरह ये विद्या मैं सीखना चाहती हूँ ,और इस प्रकार मन में सोच कर अपने पिता राज्य के प्रमुख पुजारी विद्यानंद जी का इंतज़ार करने लगी।
शाम को पिता के आते ही विद्या ने पिता जी को अपने देखे हुए पूरे अनुभव को बताया ,और स्वयं भी उड़ने की इच्छा जताई और ये विद्या सीखने की ज़िद करने लगी ,पुजारी ने उसे लाख समझाया की वह कोई विद्या नहीं है ,वह तो परी है ईश्वर से उन्हें इस तरह उड़ने की शक्ति मिली हुयी होती है.
पर विद्या ना मानी तो उसका मन रखने के लिए पुजारी जी ने कहा की ठीक है मैं  तुम्हे बताता हूँ :":सुनो उसके लिए कठिन तपस्या करनी पड़ती है तेज़ धूप,बरसात , भूख प्यास सब कुछ छोड़ के जंगल में सालो तपस्या करने के पश्चात् अगर प्रभु खुश होते है तो ये वरदान मिल पता है"
 पुजारी ने सोचा की विद्या ये सब सुन कर डर जाएगी और अपना इरादा छोड़ देगी पर ,अगले दिन सुबह विद्या घर से चली गयी और शगुन पर्वत पर बैठ कर तपस्या में लींन  हो गयी ,पुजारी ने उसे बहुत संमझाया पर विद्या ने अपनी ज़िद ना छोड़ी और ,
पिता से कहा : "पिता जी मैं तप कर के उड़ने वाले पंख ले कर ही घर आऊंगी ,"
आखिर पिता ने विद्या को उसके हाल पर छोड़ दिया और घर वापस आ गए।
इधर समय गुजरने लगा विद्या भूख प्यास सब भूल के आधी तूफ़ान धूप की परवाह किये बगैर कठिन तपस्या में लीं थी ,इधर परियों की रानी को जब ये पता चला तो वह बहुत परेशां हो गयी और सोचने लगी की अगर भगवान् ने खुश हो कर विद्या को वरदान दे दिया  तो ,परियों की जाती का मान ही खत्म हो जायेगा जो चाहेगा तपस्या कर परी की भांति शक्ति प्राप्त कर लेगा।
इसलिए उन्होंने विद्या की तपस्या को भंग करने के लिए  ,जादुई जानवरो को उसे डराने भेजा पर विद्या ने आंखे ना खोली ,फिर उन्होंने विद्या पर अग्नि वर्षा करी ,विद्या तब भी विचलित ना हुयी ,अब रानी खुद ही विद्या की तपस्या भंग करने गयी ,रानी को पता था की विद्या बहुत दयालु है इसलिए रानी ने एक बुढ़िया का वेश बनाया और विद्या के सामने बैठ कर ज़ोर ज़ोर से रोने लगी : अरे विद्या ,मेरी रक्षा करो मैं भूख से बेहाल इस जंगल में अकेली हूँ ,मेरे दोनों पैर भी टूट गए है,बेटी यदी शीघ्र पानी ना मिला तो मैं जरूर मर जाउंगी. "
वही हुआ
दयालु विद्या के कान में ये आवाज़ आते ही वो अपनी तपस्या के बारे में भूल गयी वह  तुरंत उठ खड़ी हुयी और बोली ,: माँ धैर्य रखो मैं तुरंत तुम्हारे लिए पानी खोज के लाती हूँ "
परी बोली : पर बेटी तुमने अपनी तपस्या तोड़ दी ,इतने दिन इतनी कठिन तपस्या की और सिर्फ मेरी मदद के लिए तोड़ दिया"
विद्या बोली : माँ ऐसे पंखो को ले के भी क्या फायदा जब मेरे सामने ही कोई प्राण त्याग दे ,और मैं मदद तक ना कर पाऊ "
परी विद्या की बातो से बहुत प्रस्सन हुयी और बोली :बेटी मैं परी हूँ,और मैंने देख लिया है की तुम्हारे अंदर परी बनने के सभी गुन मौजूद है,मैं तुम्हे वरदान देती  हु ,तुम जब मेरा स्मरण कर के उड़ना चाहोगी उड़ सकोगी ,हमेशा सबका भला करना "
विद्या बहुत खुश हुयी और परी का स्मरण कर अपने घर की और उड़ चली ,उसने अपने  शक्ति से वो पा लिया था जो वो पाना चाहती थी   ,और अपनी इस अनोखी शक्ति से सबकी मदद करने लगी।

to shrisansa jan

story 7
कुत्ते का लालच

एक बार की बात है एक गाँव में एक कुत्ता रहता था वह बहुत ही अलसी और  लालची था.
 एक दिन वह खाने  की खोज में  बहुत देर तक  इधर – उधर भटकता रहा. मगर उसे  कही
भी  खाना  नहीं मिला. आखिर अंत में उसे एक भोजनालय  के बाहर से गोश्त  का एक टुकड़ा
 दिखाई दिया उसने तुरंत उसे उठाया और उसे एकांत में खाने के लिये उसे मुँह में लेकर भाग गया.
एकांत स्थान  को ढूढ़ते ढूढ़ते  वह एक नदी के किनारे पहुँच गया.उसने सोचा ये स्थान खाने के लिए
उचित है और वही खड़े हो कर सोचने लगा की यही गोश्त की दावत करे  या कही और जाना ठीक होगा की ,
 अचानक उसकी  नज़र नदी में दिखती अपनी परछाई पर पड़ी .लालच में अंधे  कुत्ते ने सोचा  की
 पानी में उसकी तरह ही कोई दूसरा कुत्ता है जिसके मुँह में भी एक गोश्त का टुकड़ा है .
आलसी और बुद्धिहीन इस लालची कुत्ते ने सोचा वाह ,बिना मेहनत के क्यों न मैं  इस कुत्ते के मुँह में
 पकड़ा ये गोश्त का टुकड़ा भी छीन लू  तो मेरा पेट भी बिना मेहनत भर जायेगा और मुफ्त में मिले गोश्त से
 खाने का मजा भी  दोगुना हो जाएगा. वह अपनी ही परछाई पर  बिना सोचे समझे जोर -जोर से भौंकने लगा ,
और इस तरह भौंकने से उसका अपना गोश्त  का टुकड़ा भी नदी में गिर पड़ा  अपने लालच और आलस के
 कारण वह मुर्ख  अपना गोश्त का टुकड़ा भी खो बैठा.
गोश्त का टुकड़ा गिरते ही नदी में पानी के हिलने से उसकी परछाई भी गुम हो गयी,और उसकी समझ में सब
 आ गया की लालच में अंधे हो जाने के कारण वह अपनी ही परचई को कोई दूसरा कुत्ता समझ रहा था,
 वह बहुत पछताया तथा मुँह लटकाता हुआ गाँव को वापस आ गया.

इस कहानी से शिक्षा :

लालच बुरी बात  है हमें अपनी मेहनत या किस्मत से  जितना भी मिल जाय उसी से संतोष रहना चाहिए

shikha 
जुड़वाँ परिया
एक बार परी लोक में एक अध्भुत करिश्मा हुआ ,और नीलिमा परी के घर एक बच्चे का जन्म हुआ जो जुड़वाँ थे और दोनों ही लाल और संतरी पंखो के साथ पैदा हुयी थी और दोनों ही लड़किया थी  । आज तक परी लोक में ऐसा नहीं हुआ था। दोनों ही बच्चे बहुत स्वस्थ और खूबसूरत थे पर उनक शरीर दाहिनी तरफ से पूरी तरह जुड़ा हुआ था , धीरे धीरे बच्चे बड़े होने लगे वो साथ में खेलती,खाती हसती ,गाती और एक दूसरी की पक्की सहेलिया बन गयी थी ,पर जब वो व्यस्क हुयी तो उनके विवाह के लिए एक ऐसा लड़का तलाशा जाने लगा वो दोनों से ही विवाह कर ले ,आखिर पृथ्वी पर रहने वाला सरस् देश का राजा इसके लिए मान गया और उसने उनसे विवाह कर लिया , एक बार संतरी परी की राजा से लड़ाई हो गयी क्यूंकि उसे धरती लोक अच्छा न लगता वो वापस परी लोक जाना चाहती थी ,और उसने परी लोक वापस जाने का निर्णय ले लिया। लाल परी धर्मसंकट में पड़  गयीक्यूंकि वो अपने पति को छोड़ कर नहीं जाना चाहती थी ,उसने संतरी को समझने की बहुत कोशिश की पर वो ना मानी ,तो राजा ने सोचा की राजय वैध की मदद ली जाए ,
राज्य वैध ने कहा : प्यारे राजन ये मैं नहीं कर सकता, पर ढालू पर्वत पर रहने वाली गोरिका जादूगरनी आपकी मदद कर सकती है  .
राजा ने गोरिका को बुलाने सैनिक भेज दिए ,गोरिका ने राजा से कहा :राजा मैं सिर्फ इतना ही कर सकती हु की इनमे से एक को दूसरे के शरीर में मिला दू और ये एक बन जाए बोलिये आप किस परी के साथ रहना चाहते है ,राजा ने तुरंत लाल का नाम लिया और जादूगरनी ने अपने जादू से संत्री परी को लाल परी के शरीर में लुप्त कर दिया अब वो दिक् नहीं रही थी पर लाल के अंदर ही जीवित थी.
राजा ने सोच की मुश्किल का हल हो गया ,पर अब और परेशानी हो गयी संत्री क्रोध के कारण लाल को राजा से बात ना करने देती और लाल के साथ बहुत लड़ाई करती ,लाल का मन कही ना लगता। आखिर थक हार कर राजा ने उन्हें परी लोक वापस भेज दिया पर संतरी की लाल से दिमागी लड़ाई खत्म न हुयी , लाल खाना खाती तो संत्री उसे लाल के पेट में न जाने देती ,लाल के पंखो पर भी संतरी के पारो की झलक दिखती सीधी साधी लाल संत्री को खुश करने के लिए खुद को भूलती जा रही थी। परी रानी को जान ये पता चला तो उन्होंने लाल के अंदर से संतरी को बाहर निकाला और कहा की मैं तुम दोनों को अलग कर देती हु पर इससे सिर्फ एक ही जिन्दा रहेगा बोलो  किसे जीना है संत्री ने कहा ये लाल तो पहले ही मुझे मार चुकी थी अब मेरी बारी है ,रानी माँ ने तलवार से दोनों को अलग कर दिया , संत्री तुरंत उड़ कर अपने घर चली गयी ,  और लाल उसकी सलामती की दुआए मांगने लगी, रानी परी का त्याग देख कर बहुत खुश हुयी और उन्होंने लाल को भी जीवन दान दे दिया ,और वो वापस राजा के पास चली गयी और इस प्रकार ,ये जुड़वा परिया आराम से जीवन बिताने लगी 
झोपडी का जादुई  रहस्य और परी 

बहुत समय पहले की बात है एक घने जंगल के किनारे एक छोटा सा गाव था जिसमे। एक बुढ़िया रहती थी बुढ़िया के घर में कोई नहीं था  ,और ना ही वो कोई काम करती फिर भी उसे कभी किसी की मदद नहीं पड़ती। गाँव के लोग बड़े परेशां रहते सबके पास सब कुछ होते हुए भी ,कभी न कभी मदद की जरुरत पड़ जाती, पर ये बुढ़िया थी की इसे किसी से कोई मतलब ही नहीं था ,लोगो की जलन ने ,उन्हें बुढ़िया के इस तरह अकेले ही खुश  संतुष्ट रहने के राज का  पता लगाने के लिए ,सोचा की हम बुढ़िया के घर रोज़ पहरा देंगे और देखेंगे की आखिर इसकी ख़ुशी और संतुष्टि का राज़ क्या है सो रोज़ गांव का कोई ना कोई व्यक्ति बुढ़िया के घर पहरा देने लगा पर बुढ़िया कभी बहार आती ही ना थी ,इसलिए पहरा देने वाले रात होते होते थक हर और ऊब कर सो जाते ,
आज मनोज जो गाव का सबसे कंम बुद्धि  लड़का था ,जिसे कोई प्यार नहीं करता था पहरा देने की उसकी बारी थी , मनोज ने सोचा मैं किसी भी तरफ आज सोऊंगा नहीं और बुढ़िया के राज का पता लगा के ही रहूँगा और बुढ़िया की झोपडी के पास एक तालाब में खड़ा हो गया ,तालाब की मछलिया उसे काटती और उसकी नींद भाग जाती ,काफी रात तक कुछ नहीं हुआ तो वो भी ऊबने लगा पर तभी उसने देखा की बुढ़िया की झोपड़ी का दरवाज़ा खुला और बुढ़िया  हाथ में एक दीपक लिए जंगल की तरफ बढ़ने लगी ,मनोज तुरंत तालाब से बाहर आ क्र धीरे धीर बुढ़िया का पीछा करने लगा ,जंगल में काफी अंदर जाने पर एक झोपडी दिखाई दी जो बुढ़िया के वह पहुंचते ही स्वर्ण की तरह चमकने लगी ,मनोज बहुत डर  गया फिर भी हिम्मत कर देखता रहा ,और धीरे धीरे बुढ़िया एक सुनहरी परी में बदल गयी उसके लम्बे घने और खुबसूरत सुनहरे पर निकल आये ,और झोपडी से एक के बाद एक रंग बिरंगी परिया निकलने लगी और सुनहरी परी को प्रणाम कर उसे विभिन्न प्रकार के आभूषणों और कपड़ो से सजा कर उन्होंने सुनहरी परी को एक सिंघासन पर बैठा दिया और उसके सामने तरह तरह के नृत्य करने लगी ,सुनहरी परी हर परी को अपने पास बुलाती और उसकी इसने अनुसार उसे वर देती ,और कुछ देर बाद सुनहरी परी फिर बुढया के रूप में आ गयी और झोपडी और परिया सब गायब हो गया ,बुढ़िया ने भी वापस अपनी झोपडी में आ कर दरवाज़ा बंद कर लिया।
मनोज को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था मनोज ने गाँव वालो इस जादुई झोपडी और परियो की  बाते बताने का प्रयत्न किया  पर सब उसे कंबुद्धि मान के हंसने लगे , मनोज को लगा इन्हे सबूत देना ही होगा। और अगली रात जब फिर ऐसा ही हुआ तो मनोज बिना मृत्यु के डर  के  परी के सामने जा कर खड़ा हो गया ,सब परिया आश्चर्य से उसे देखने लगी।
मनोज बोला :माँ मेरी बात कोई नहीं मनता की आप परी है सब मुझ पे हँसते है, क्या आप मुझे अपने परी होने की कोई निशनी दे सकती है ?
सुनहरी परी बोली :मनोज अगर तुम ये राज़ किसी को नहीं बताओगे तो मैं तुम्हे जो मांगोगे दूंगी "
मनोज बोला :नहीं माँ ,मैं गाँव वालो को बताना चाहता हूँ की मैं, कम अक्ल नहीं हूँ ,और मैंने सच ही आपको परी रूप में देखा है ,
उसके भोलेपन पर परी बहुत खुश हुयी और बोली: बेटा एक शाप के कारण मुझे इंसानो के बीच  इंसानी रूप में रहना पड़ रहा था ,पर आज वो शाप खत्म हो गया आज मैं यहाँ से जा रही हूँ पर तुम्हारी इच्छा जरूर पूरी करुँगी। ,और परी अपने असली रूप में ही गाँव वापस आ गयी हुए सभी गाँव वालो के बीच आ कर उसने मनोज को सबसे शक्तशाली और बुद्धिमान होने का आशीर्वाद दिया ,और
गांववालों को कहा :"सुनो गाँव वालो  मनोज एक सच्चा इंसान है और उसे ही गांव  सरपंच बनाया जाये वो ही गांव वालो की रक्षा और सही न्याय  कर सकता है,"
और  अंतर्ध्यान हो गयी,और गांव वालो ने शक्तिशाली और बुद्धिमान मनोज को गांव का सरपंच बना दिया ,सच्चाई की जीत हुयी और मनोज अपनी सच्चाई के कारण मिले वरदान के फलस्वरूप आराम से जीने लगा 
जादुई माला 

एक गाँव में रामु नाम  का एक बहुत ही शैतान आदमी रहा करता था ,वो किसी पर दया ना करता ,और जो चाहता लोगो से छीन लिया करता था ये देख कर गाँव के लोगो लो बहुत परेशानी होने लगी और वे उससे बचाव के लिए रस्ते ढूढ़ने लगे ,एक बार गरीब किसान हरीश अपनी कड़ी मेहनत से उगाई गयी फसल बेच कर मिले पैसो से अपनी पत्नी के लिए दवाइया और फल आदि ले कर आ रहा था , की रामु ने उसे पकड़ लिया और उससे पैसे आदि मांगने लगा ,हरीश लाख रोया चिल्लाया पर रामु ने सारी  दवाइया फेक दी और फल छीन कर ले गया ,बिना दवाई हरीश की पत्नी की मौत हो गयी ,अब हरीश का कोई नहीं था हरीश ने फैसला किया की वो रामु को सजा जरूर देगा ,और जंगल में जा कर कठोर तप करने लगा ,उसी जंगल से एक पारी जा रही थी जब उसने हरीश को तप करते देखा तो उसे हरीश  पर दया आयी
 और वो बोली :"बोलो बेटे तुम क्या चाहते हो "
तो हरिश ने उसे रामु के अत्याचार के बारे में सारी  बात बताई
जिसे सुन कर परी बोली ,बेटा मैं तुम्हारी और कोई तो सहायता नहीं कर सकती पर , तुम को ये माला देती हु ,ये जादुई माला है ,इसे पहनते ही तुम अद्रश्य हो जाओगे और तुम्हे कोई देख नहीं पायेगा ,रामु को सजा देने के लिए इसका क्या इस्तेमाल करोगे तुम सोचो। "
और चली गयी ,हरीश ने माला को पहना और सीधा रामु के घर चला गया ,रामु उस समय सो रहां था उसने एक बाल्टी पानी रामु पर डाल दिया रामु को कुछ समझ  नहीं आया की आखिर उसके ऊपर पानी कहा से आया  ,जब रामु नहाने गया तो हरीश ने उसके कपडे छुपा दिए ,किसी तरह कपडे ढूंढ  कर रामु बाहर आया वो बहुत डर गया था ,उसने देखा उसके कमरे का सब सामान एक के ऊपर एक रखा हुआ है ,रामु को लगा उसने इतने लोगो को सताया है जरूर किसी का भूत उन्हें तंग कर रहा है वो हाथ जोड़ कर माफ़ी मांगने लगा ,उसी समय किसी ने उसे धक्का दे दिया और वो जोर से गिर पड़ा ,वह मदद के लिए चलने लगा पर नाराज़ गांववाले उसकी मदद को नहीं आये हरीश उसे ना खाने देता ना सोने अपनी जान बचा कर वो जंगल की ओर भागने लगा ,
तो हरीश उसे  उसी जगह ले आया जहा उसने उसकी दवाइया छीनी थी
 और बोला : जाओ रामु  की तुम हरीश की पत्नी को वापस ले आओ तो मैं तुम्हे छोड़ दूंगा ,"
रामु बोला :" पर वो तो मर गयी ,
हरीश ने कहा: तुम उसकी मौत का कारण हो अब हरीश अकेला है वो किस के सहारे जियेगा"
 तो रामु हाथ जोड़ कर बोला "" मुझे माफ़ कर दो ,मैं कड़ी मेहनत कर के सारी  उम्र हरीश का ध्यान रखूँगा। "
,हरीश ने कहा :तुम दूसरे गाँव वालो को भी सताते हो तुम्हे काम कौन देगा?'
 रामु ने वादा किया की वो अब किसी को दुःख नहीं पहुचायेगा ,
हरीश ने अदृश्य रूप में ही रामु से कहा:" जाओ और हरीश से मदद की भीख मांगो और माफ़ी मागो अगर उसने माफ़ कर दिया तो मैं  तुम्हे सताना बंद कर दूंगा ,."
रामु हरीश के घर पंहुचा वह हरीश पहले ही पहुंच गया  था और माला उतार के रामु का इंतज़ार कर रहा था ,
रामु ने कहा :हरीश मुझे माफ़ कर दो और अपने खेत में मुझे कान दे दो मैं सारी  उम्र तुम्हारी देख भल करूँगा" हरीश ने रामु को माफ़ कर दिया ,और रामु सारी  उम्र हरीश का सेवक बन कर जिंदगी बिताने लगा और इस प्रकार अपनी चतुराई और जादुई माला की मदद से हरीश ने रामु को सजा दी और सही रा ह पर ले आया  ।