झोपडी का जादुई रहस्य और परी
बहुत समय पहले की बात है एक घने जंगल के किनारे एक छोटा सा गाव था जिसमे। एक बुढ़िया रहती थी बुढ़िया के घर में कोई नहीं था ,और ना ही वो कोई काम करती फिर भी उसे कभी किसी की मदद नहीं पड़ती। गाँव के लोग बड़े परेशां रहते सबके पास सब कुछ होते हुए भी ,कभी न कभी मदद की जरुरत पड़ जाती, पर ये बुढ़िया थी की इसे किसी से कोई मतलब ही नहीं था ,लोगो की जलन ने ,उन्हें बुढ़िया के इस तरह अकेले ही खुश संतुष्ट रहने के राज का पता लगाने के लिए ,सोचा की हम बुढ़िया के घर रोज़ पहरा देंगे और देखेंगे की आखिर इसकी ख़ुशी और संतुष्टि का राज़ क्या है सो रोज़ गांव का कोई ना कोई व्यक्ति बुढ़िया के घर पहरा देने लगा पर बुढ़िया कभी बहार आती ही ना थी ,इसलिए पहरा देने वाले रात होते होते थक हर और ऊब कर सो जाते ,
आज मनोज जो गाव का सबसे कंम बुद्धि लड़का था ,जिसे कोई प्यार नहीं करता था पहरा देने की उसकी बारी थी , मनोज ने सोचा मैं किसी भी तरफ आज सोऊंगा नहीं और बुढ़िया के राज का पता लगा के ही रहूँगा और बुढ़िया की झोपडी के पास एक तालाब में खड़ा हो गया ,तालाब की मछलिया उसे काटती और उसकी नींद भाग जाती ,काफी रात तक कुछ नहीं हुआ तो वो भी ऊबने लगा पर तभी उसने देखा की बुढ़िया की झोपड़ी का दरवाज़ा खुला और बुढ़िया हाथ में एक दीपक लिए जंगल की तरफ बढ़ने लगी ,मनोज तुरंत तालाब से बाहर आ क्र धीरे धीर बुढ़िया का पीछा करने लगा ,जंगल में काफी अंदर जाने पर एक झोपडी दिखाई दी जो बुढ़िया के वह पहुंचते ही स्वर्ण की तरह चमकने लगी ,मनोज बहुत डर गया फिर भी हिम्मत कर देखता रहा ,और धीरे धीरे बुढ़िया एक सुनहरी परी में बदल गयी उसके लम्बे घने और खुबसूरत सुनहरे पर निकल आये ,और झोपडी से एक के बाद एक रंग बिरंगी परिया निकलने लगी और सुनहरी परी को प्रणाम कर उसे विभिन्न प्रकार के आभूषणों और कपड़ो से सजा कर उन्होंने सुनहरी परी को एक सिंघासन पर बैठा दिया और उसके सामने तरह तरह के नृत्य करने लगी ,सुनहरी परी हर परी को अपने पास बुलाती और उसकी इसने अनुसार उसे वर देती ,और कुछ देर बाद सुनहरी परी फिर बुढया के रूप में आ गयी और झोपडी और परिया सब गायब हो गया ,बुढ़िया ने भी वापस अपनी झोपडी में आ कर दरवाज़ा बंद कर लिया।
मनोज को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था मनोज ने गाँव वालो इस जादुई झोपडी और परियो की बाते बताने का प्रयत्न किया पर सब उसे कंबुद्धि मान के हंसने लगे , मनोज को लगा इन्हे सबूत देना ही होगा। और अगली रात जब फिर ऐसा ही हुआ तो मनोज बिना मृत्यु के डर के परी के सामने जा कर खड़ा हो गया ,सब परिया आश्चर्य से उसे देखने लगी।
मनोज बोला :माँ मेरी बात कोई नहीं मनता की आप परी है सब मुझ पे हँसते है, क्या आप मुझे अपने परी होने की कोई निशनी दे सकती है ?
सुनहरी परी बोली :मनोज अगर तुम ये राज़ किसी को नहीं बताओगे तो मैं तुम्हे जो मांगोगे दूंगी "
मनोज बोला :नहीं माँ ,मैं गाँव वालो को बताना चाहता हूँ की मैं, कम अक्ल नहीं हूँ ,और मैंने सच ही आपको परी रूप में देखा है ,
उसके भोलेपन पर परी बहुत खुश हुयी और बोली: बेटा एक शाप के कारण मुझे इंसानो के बीच इंसानी रूप में रहना पड़ रहा था ,पर आज वो शाप खत्म हो गया आज मैं यहाँ से जा रही हूँ पर तुम्हारी इच्छा जरूर पूरी करुँगी। ,और परी अपने असली रूप में ही गाँव वापस आ गयी हुए सभी गाँव वालो के बीच आ कर उसने मनोज को सबसे शक्तशाली और बुद्धिमान होने का आशीर्वाद दिया ,और
गांववालों को कहा :"सुनो गाँव वालो मनोज एक सच्चा इंसान है और उसे ही गांव सरपंच बनाया जाये वो ही गांव वालो की रक्षा और सही न्याय कर सकता है,"
और अंतर्ध्यान हो गयी,और गांव वालो ने शक्तिशाली और बुद्धिमान मनोज को गांव का सरपंच बना दिया ,सच्चाई की जीत हुयी और मनोज अपनी सच्चाई के कारण मिले वरदान के फलस्वरूप आराम से जीने लगा
बहुत समय पहले की बात है एक घने जंगल के किनारे एक छोटा सा गाव था जिसमे। एक बुढ़िया रहती थी बुढ़िया के घर में कोई नहीं था ,और ना ही वो कोई काम करती फिर भी उसे कभी किसी की मदद नहीं पड़ती। गाँव के लोग बड़े परेशां रहते सबके पास सब कुछ होते हुए भी ,कभी न कभी मदद की जरुरत पड़ जाती, पर ये बुढ़िया थी की इसे किसी से कोई मतलब ही नहीं था ,लोगो की जलन ने ,उन्हें बुढ़िया के इस तरह अकेले ही खुश संतुष्ट रहने के राज का पता लगाने के लिए ,सोचा की हम बुढ़िया के घर रोज़ पहरा देंगे और देखेंगे की आखिर इसकी ख़ुशी और संतुष्टि का राज़ क्या है सो रोज़ गांव का कोई ना कोई व्यक्ति बुढ़िया के घर पहरा देने लगा पर बुढ़िया कभी बहार आती ही ना थी ,इसलिए पहरा देने वाले रात होते होते थक हर और ऊब कर सो जाते ,
आज मनोज जो गाव का सबसे कंम बुद्धि लड़का था ,जिसे कोई प्यार नहीं करता था पहरा देने की उसकी बारी थी , मनोज ने सोचा मैं किसी भी तरफ आज सोऊंगा नहीं और बुढ़िया के राज का पता लगा के ही रहूँगा और बुढ़िया की झोपडी के पास एक तालाब में खड़ा हो गया ,तालाब की मछलिया उसे काटती और उसकी नींद भाग जाती ,काफी रात तक कुछ नहीं हुआ तो वो भी ऊबने लगा पर तभी उसने देखा की बुढ़िया की झोपड़ी का दरवाज़ा खुला और बुढ़िया हाथ में एक दीपक लिए जंगल की तरफ बढ़ने लगी ,मनोज तुरंत तालाब से बाहर आ क्र धीरे धीर बुढ़िया का पीछा करने लगा ,जंगल में काफी अंदर जाने पर एक झोपडी दिखाई दी जो बुढ़िया के वह पहुंचते ही स्वर्ण की तरह चमकने लगी ,मनोज बहुत डर गया फिर भी हिम्मत कर देखता रहा ,और धीरे धीरे बुढ़िया एक सुनहरी परी में बदल गयी उसके लम्बे घने और खुबसूरत सुनहरे पर निकल आये ,और झोपडी से एक के बाद एक रंग बिरंगी परिया निकलने लगी और सुनहरी परी को प्रणाम कर उसे विभिन्न प्रकार के आभूषणों और कपड़ो से सजा कर उन्होंने सुनहरी परी को एक सिंघासन पर बैठा दिया और उसके सामने तरह तरह के नृत्य करने लगी ,सुनहरी परी हर परी को अपने पास बुलाती और उसकी इसने अनुसार उसे वर देती ,और कुछ देर बाद सुनहरी परी फिर बुढया के रूप में आ गयी और झोपडी और परिया सब गायब हो गया ,बुढ़िया ने भी वापस अपनी झोपडी में आ कर दरवाज़ा बंद कर लिया।
मनोज को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था मनोज ने गाँव वालो इस जादुई झोपडी और परियो की बाते बताने का प्रयत्न किया पर सब उसे कंबुद्धि मान के हंसने लगे , मनोज को लगा इन्हे सबूत देना ही होगा। और अगली रात जब फिर ऐसा ही हुआ तो मनोज बिना मृत्यु के डर के परी के सामने जा कर खड़ा हो गया ,सब परिया आश्चर्य से उसे देखने लगी।
मनोज बोला :माँ मेरी बात कोई नहीं मनता की आप परी है सब मुझ पे हँसते है, क्या आप मुझे अपने परी होने की कोई निशनी दे सकती है ?
सुनहरी परी बोली :मनोज अगर तुम ये राज़ किसी को नहीं बताओगे तो मैं तुम्हे जो मांगोगे दूंगी "
मनोज बोला :नहीं माँ ,मैं गाँव वालो को बताना चाहता हूँ की मैं, कम अक्ल नहीं हूँ ,और मैंने सच ही आपको परी रूप में देखा है ,
उसके भोलेपन पर परी बहुत खुश हुयी और बोली: बेटा एक शाप के कारण मुझे इंसानो के बीच इंसानी रूप में रहना पड़ रहा था ,पर आज वो शाप खत्म हो गया आज मैं यहाँ से जा रही हूँ पर तुम्हारी इच्छा जरूर पूरी करुँगी। ,और परी अपने असली रूप में ही गाँव वापस आ गयी हुए सभी गाँव वालो के बीच आ कर उसने मनोज को सबसे शक्तशाली और बुद्धिमान होने का आशीर्वाद दिया ,और
गांववालों को कहा :"सुनो गाँव वालो मनोज एक सच्चा इंसान है और उसे ही गांव सरपंच बनाया जाये वो ही गांव वालो की रक्षा और सही न्याय कर सकता है,"
और अंतर्ध्यान हो गयी,और गांव वालो ने शक्तिशाली और बुद्धिमान मनोज को गांव का सरपंच बना दिया ,सच्चाई की जीत हुयी और मनोज अपनी सच्चाई के कारण मिले वरदान के फलस्वरूप आराम से जीने लगा
No comments:
Post a Comment