Tuesday, 7 July 2020

जुड़वाँ परिया
एक बार परी लोक में एक अध्भुत करिश्मा हुआ ,और नीलिमा परी के घर एक बच्चे का जन्म हुआ जो जुड़वाँ थे और दोनों ही लाल और संतरी पंखो के साथ पैदा हुयी थी और दोनों ही लड़किया थी  । आज तक परी लोक में ऐसा नहीं हुआ था। दोनों ही बच्चे बहुत स्वस्थ और खूबसूरत थे पर उनक शरीर दाहिनी तरफ से पूरी तरह जुड़ा हुआ था , धीरे धीरे बच्चे बड़े होने लगे वो साथ में खेलती,खाती हसती ,गाती और एक दूसरी की पक्की सहेलिया बन गयी थी ,पर जब वो व्यस्क हुयी तो उनके विवाह के लिए एक ऐसा लड़का तलाशा जाने लगा वो दोनों से ही विवाह कर ले ,आखिर पृथ्वी पर रहने वाला सरस् देश का राजा इसके लिए मान गया और उसने उनसे विवाह कर लिया , एक बार संतरी परी की राजा से लड़ाई हो गयी क्यूंकि उसे धरती लोक अच्छा न लगता वो वापस परी लोक जाना चाहती थी ,और उसने परी लोक वापस जाने का निर्णय ले लिया। लाल परी धर्मसंकट में पड़  गयीक्यूंकि वो अपने पति को छोड़ कर नहीं जाना चाहती थी ,उसने संतरी को समझने की बहुत कोशिश की पर वो ना मानी ,तो राजा ने सोचा की राजय वैध की मदद ली जाए ,
राज्य वैध ने कहा : प्यारे राजन ये मैं नहीं कर सकता, पर ढालू पर्वत पर रहने वाली गोरिका जादूगरनी आपकी मदद कर सकती है  .
राजा ने गोरिका को बुलाने सैनिक भेज दिए ,गोरिका ने राजा से कहा :राजा मैं सिर्फ इतना ही कर सकती हु की इनमे से एक को दूसरे के शरीर में मिला दू और ये एक बन जाए बोलिये आप किस परी के साथ रहना चाहते है ,राजा ने तुरंत लाल का नाम लिया और जादूगरनी ने अपने जादू से संत्री परी को लाल परी के शरीर में लुप्त कर दिया अब वो दिक् नहीं रही थी पर लाल के अंदर ही जीवित थी.
राजा ने सोच की मुश्किल का हल हो गया ,पर अब और परेशानी हो गयी संत्री क्रोध के कारण लाल को राजा से बात ना करने देती और लाल के साथ बहुत लड़ाई करती ,लाल का मन कही ना लगता। आखिर थक हार कर राजा ने उन्हें परी लोक वापस भेज दिया पर संतरी की लाल से दिमागी लड़ाई खत्म न हुयी , लाल खाना खाती तो संत्री उसे लाल के पेट में न जाने देती ,लाल के पंखो पर भी संतरी के पारो की झलक दिखती सीधी साधी लाल संत्री को खुश करने के लिए खुद को भूलती जा रही थी। परी रानी को जान ये पता चला तो उन्होंने लाल के अंदर से संतरी को बाहर निकाला और कहा की मैं तुम दोनों को अलग कर देती हु पर इससे सिर्फ एक ही जिन्दा रहेगा बोलो  किसे जीना है संत्री ने कहा ये लाल तो पहले ही मुझे मार चुकी थी अब मेरी बारी है ,रानी माँ ने तलवार से दोनों को अलग कर दिया , संत्री तुरंत उड़ कर अपने घर चली गयी ,  और लाल उसकी सलामती की दुआए मांगने लगी, रानी परी का त्याग देख कर बहुत खुश हुयी और उन्होंने लाल को भी जीवन दान दे दिया ,और वो वापस राजा के पास चली गयी और इस प्रकार ,ये जुड़वा परिया आराम से जीवन बिताने लगी 

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