to shrisansa jan
story 7
कुत्ते का लालच
एक बार की बात है एक गाँव में एक कुत्ता रहता था वह बहुत ही अलसी और लालची था.
एक दिन वह खाने की खोज में बहुत देर तक इधर – उधर भटकता रहा. मगर उसे कही
भी खाना नहीं मिला. आखिर अंत में उसे एक भोजनालय के बाहर से गोश्त का एक टुकड़ा
दिखाई दिया उसने तुरंत उसे उठाया और उसे एकांत में खाने के लिये उसे मुँह में लेकर भाग गया.
एकांत स्थान को ढूढ़ते ढूढ़ते वह एक नदी के किनारे पहुँच गया.उसने सोचा ये स्थान खाने के लिए
उचित है और वही खड़े हो कर सोचने लगा की यही गोश्त की दावत करे या कही और जाना ठीक होगा की ,
अचानक उसकी नज़र नदी में दिखती अपनी परछाई पर पड़ी .लालच में अंधे कुत्ते ने सोचा की
पानी में उसकी तरह ही कोई दूसरा कुत्ता है जिसके मुँह में भी एक गोश्त का टुकड़ा है .
आलसी और बुद्धिहीन इस लालची कुत्ते ने सोचा वाह ,बिना मेहनत के क्यों न मैं इस कुत्ते के मुँह में
पकड़ा ये गोश्त का टुकड़ा भी छीन लू तो मेरा पेट भी बिना मेहनत भर जायेगा और मुफ्त में मिले गोश्त से
खाने का मजा भी दोगुना हो जाएगा. वह अपनी ही परछाई पर बिना सोचे समझे जोर -जोर से भौंकने लगा ,
और इस तरह भौंकने से उसका अपना गोश्त का टुकड़ा भी नदी में गिर पड़ा अपने लालच और आलस के
कारण वह मुर्ख अपना गोश्त का टुकड़ा भी खो बैठा.
गोश्त का टुकड़ा गिरते ही नदी में पानी के हिलने से उसकी परछाई भी गुम हो गयी,और उसकी समझ में सब
आ गया की लालच में अंधे हो जाने के कारण वह अपनी ही परचई को कोई दूसरा कुत्ता समझ रहा था,
वह बहुत पछताया तथा मुँह लटकाता हुआ गाँव को वापस आ गया.
इस कहानी से शिक्षा :
लालच बुरी बात है हमें अपनी मेहनत या किस्मत से जितना भी मिल जाय उसी से संतोष रहना चाहिए
shikha
story 7
कुत्ते का लालच
एक बार की बात है एक गाँव में एक कुत्ता रहता था वह बहुत ही अलसी और लालची था.
एक दिन वह खाने की खोज में बहुत देर तक इधर – उधर भटकता रहा. मगर उसे कही
भी खाना नहीं मिला. आखिर अंत में उसे एक भोजनालय के बाहर से गोश्त का एक टुकड़ा
दिखाई दिया उसने तुरंत उसे उठाया और उसे एकांत में खाने के लिये उसे मुँह में लेकर भाग गया.
एकांत स्थान को ढूढ़ते ढूढ़ते वह एक नदी के किनारे पहुँच गया.उसने सोचा ये स्थान खाने के लिए
उचित है और वही खड़े हो कर सोचने लगा की यही गोश्त की दावत करे या कही और जाना ठीक होगा की ,
अचानक उसकी नज़र नदी में दिखती अपनी परछाई पर पड़ी .लालच में अंधे कुत्ते ने सोचा की
पानी में उसकी तरह ही कोई दूसरा कुत्ता है जिसके मुँह में भी एक गोश्त का टुकड़ा है .
आलसी और बुद्धिहीन इस लालची कुत्ते ने सोचा वाह ,बिना मेहनत के क्यों न मैं इस कुत्ते के मुँह में
पकड़ा ये गोश्त का टुकड़ा भी छीन लू तो मेरा पेट भी बिना मेहनत भर जायेगा और मुफ्त में मिले गोश्त से
खाने का मजा भी दोगुना हो जाएगा. वह अपनी ही परछाई पर बिना सोचे समझे जोर -जोर से भौंकने लगा ,
और इस तरह भौंकने से उसका अपना गोश्त का टुकड़ा भी नदी में गिर पड़ा अपने लालच और आलस के
कारण वह मुर्ख अपना गोश्त का टुकड़ा भी खो बैठा.
गोश्त का टुकड़ा गिरते ही नदी में पानी के हिलने से उसकी परछाई भी गुम हो गयी,और उसकी समझ में सब
आ गया की लालच में अंधे हो जाने के कारण वह अपनी ही परचई को कोई दूसरा कुत्ता समझ रहा था,
वह बहुत पछताया तथा मुँह लटकाता हुआ गाँव को वापस आ गया.
इस कहानी से शिक्षा :
लालच बुरी बात है हमें अपनी मेहनत या किस्मत से जितना भी मिल जाय उसी से संतोष रहना चाहिए
shikha
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