Wednesday, 13 February 2019

परी का वरदान


परी का वरदान
एक समय की बात है ,उस समय आज की तरह तरह तरह की मिठाईया ,टॉफी ,चॉक्लेट आदि नहीं हुआ करते थे ,बच्चो की माँ ,दादी या नानी उनके लिए कुछ विभिन्न तरह की मिठाईया बनाया करती थी जिसे वह बहुत प्यार से खाते  थे ,रामु की नानी भी उसके लिए खूब सारे लड्डू बनाया करती थी ,गोल मटोल मीठे मीठे लड्डू रामु को बहुत प्रिय थे और उनको खाने के लिए रामु नानी माँ की हर बात भी मान जाया करता था ,रामु के माता पिता बहुत पहले गांव में आये तूफान में मर चुके थे रामु के पास केवल अब नानी माँ ही बची थी।
एक बार नानी माँ बहुत बीमार हो गयी और कही  बहार काम करने भी ना जा पायी जिस कारण से घर में खाने के लिए कुछ भी ना बचा ,आज रामु को बहुत भूख लग रही थी वह नानी माँ के पास जा कर भूख से रोने लगा नानी माँ ने कहा प्यारे बेटे रो मत बाहर खेत पर जा वहाँ  जो भी मिले काट कर घर ले आ मैं  तेरे लिए लड्डू जरूर बना दूंगी ,रामु नानी माँ की बात मान कर खेत की तरफ चल पड़ा कुछ आगे जाने पर उसे बड़ी बड़ी घास दिखाई दी ,रामु छोटा सा बचा था उसने सोचा की नानी माँ ने  कहा है जो मिले ले आना तो क्यों न मैं  इसे ही काट कर ले चलु और घास काटने लगा उसने काफी सारी  घास काट ली ,वापस आते समय उसने देखा की एक बकरी अपने छोटे से बच्चे के लिए खाने को कुछ खोज  रही है तो रामु ने कुछ  ताज़ी घास उसे दे दी बकरी ने रामु को बहुत आशीर्वाद दिया,कुछ आगे जाने पर एक गाये मिली वो भी लचार दृष्टि से रामु की घास की तरफ देख रही थी क्यूंकि उसके पैर  में घाव था और वो खाने को ढूढ़ने नहीं जा सकती थी ,रामु ने उसे भी कुछ घास दे दी ,अब उसके पास थोड़ी सी ही घास बची थी की उसने देखा की एक घोडा भी उदास सा बैठा है और उसके मालिक उसे बांध कर बिना खाना दिए ही  कही चले गए थे , छोटे से दयालु रामु ने बची सारी  घास उसे दे दी और चुप चाप नानी माँ के पास  आ के बैठ गया ,नानी ने पूछा अरे तुझे कुछ मिला नहीं ,तो रामु ने उदास स्वर में कहा नानी माँ अब मुझे भूख  नहीं लग रही और सो गयाऔर नानी माँ की भी उसी रात भूख और बिमारी से मृत्यु हो गयी.
अब रामु बहुत अकेला था।  रामु की दयालुता एक परी बडे दिनों  से देख रही थी उसने रामु को जगाया और अपनी गोद  में बैठा कर भर पेट खाना खिलाया ,और कहा मैं तुम से बहुत प्रस्सन हूँ बोलो रामु तुम्हे क्या चाहिए ?रामु ने कहाँ परी माँ मुझे बस लड्डू चाहिए रोज़ ,पारी ज़ोर से हंसी और बोली प्यारे रामु तुम सिर्फ दयालु ही नहीं बहुत भोले भी हो मई तुमसे बहुत प्रस्सन हुई ,और तुम्हे पूर्ण संतुष्टि का वर देती हूँ दिन में एक बार जो चाहोगे हो जायेगा सबकी मदद करो ,पर किसी का बुरा चाहा तो ये वर हमेशा के लिए खतम हो जायेगा।
रामु बहुत खुश हुआ अगले ही दिन उसने कहा मेरी नानी माँ ठीक हो जाये और नानी माँ स्वस्थ हो गयी ,अगले दिन घर मांग लिया,फिर खिलोने ,कपड़े ,खाना इसतरह रोज़ ही कुछ मांगता रहता ,पर अब वह पहले जैसा नहीं रहा बहुत आलसी हो गया था ,किसी की इज़्ज़त नहीं करता ,किसी पर दया नहीं करता बस रात दिन कल क्या मांगना  है सोचा करता ,एक बार एक गरीब आदमी अपने बच्चे को ले कर आया और बोला  रामु तुंहरे पास सब कुछ है आज क्या तुम मेरे बेटे के लिए स्वस्थ मांग डोज वो बहुत बीमार है मेरे पास इलाज के लिए पैसे भी नहीं ,रामु ने तुरंत इंकार कर दिया और बोलै अरे नहीं आज तो मुझे हलवा खाने का मन है गर्म गर्म तूम जाओ यहाँ से भिखा री की तरह मांगो मत जा कर काम करो. कुछ ही देर में उस बच्चे की मौत हो गयी।
रामु कोई दुःख नहीं हुआ और उसने कहा मुझे गर्म गर्म गाजर का हलवा चाहिए बादाम वाला पर कुछ भी ना हुआ बार मांगने पर भी रामु को अब कुछ नहीं मिलता क्यूंकि परी के कहे अनुसार रामु ने किसी की मदद नहीं की इसलिए परी  का वर हमेशा के लिए खत्म हो गया , और रामु को भी मांगने के सिवा और कुछ भी नहीं आता था इसलिए धीरे धीरे उसकी सारी  सम्पति खत्म हो गयी और वह मांग मांग कर जिंदगी बिताने लगा।
इसलिए बच्चो जो म्हणत से मिले उसी को अपनाना चाहिए





Friday, 8 February 2019

परियो का जादुई उपहार

                                             परियो का जादुई उपहार 
किसी देश में एक राजा रहता था ।वह बहुत दयालु और न्यायी था एक बार वह  राजा, एक दिन अपने दरबार में बैठा हुआ था । 
की  उसके राज्य मंत्री ने उससे कहा : “महाराज गजब हो गया ! एक आदमी कह रहा था, कि कल उसने आसमान में उड़ती हुई एक खूबसूरत सफ़ेद परी देखी है ।राजा को अफवाहों से सख्त नफरत थी राजा ने यह सुनते ही  तुरंत उस आदमी को  बुलवाया । वह बेचारा घबराते और डरते राजा के पास पहुंचा । 
राजा ने उससे कहा  : बोलो सच बताओ ,क्या तुमने सचमुच परी देखी है ?”

वह गरीब व्यक्ति कांपता हुआ बोला: ”हां मेरे  महाराज!”वह बहुत सुदर सफ़ेद चमकते हुए  कपड़े  पहने हुए थी उसके सर पर मुकुट और हाथ में एक जादू की छड़ी थी उसके शरीर से प्रकाश निकल रहा था ।उसके पख बहुत ही सूंदर और चमकीले  थे । ”
राजा ने कहा : पूर्ण असत्य ,तुम झूठ बोलते हो  । भला  परियां भी होती हैं  भोले भले लोगों को क्यों बहकाते हो ।”
राजा हे उसे अफवाह फ़ैलाने के जुर्म में अपने सिपाहियों को आदेश देकर  उस  व्यक्ति को जेल  में डलवा दिया । शाम होने पर राजा जब अपने महल में आया । तो  वह  बहुत उदास था । रानी ने राजा से उसकी उदासी का कारण पूछा तो उसने रानी को बताया की -आज दरबार में एक आदमी कह रहा था कि उसने परी देखी है । तुम ही बताओ परियां भी कहीं होती हैं । मैंने उस आदमी को अफवाहें फैलाने के जुर्म  में कारागार  में डलवा दिया, लेकिन मेरे मन में यह दुविधा  है कि उसकी बात कही  सत्य न हो वर्ण मुझे अन्यायी कहा जायेगा  ।
रानी बोली : ”महाराज! यदि परियां नहीं होती तो उनकी कहानियां लोग कैसे  सुनाते? परिया जरूर होती होंगी ,आपने उस आदमी को जेल  में डाल कर अच्छा नहीं किया 
 राजा फिर उदास और परेशान  हो गया । कुछ देर बाद उसने खाना खाया और सोने के लिए अपने महल के कमरे  में चला गया ।
कुछ देर बाद राजा ने देखा कि उसके सामने  एक परी सफ़ेद कपड़ो में खड़ी जादुई छड़ी के साथ मुस्करा रही है, और उसके शरीर से निकलने वाले प्रकाश से  सारे  कमरे  में  रोशनी  है । राजा हैरान  हो गया । परी  बोली : ”हे राजा  तुम कहते थे ना कि परियां नहीं होती । अब देखो, मैं ही परी हूं  तुम्हें अभी भी विश्वास न हो तो मैं तुम्हें बंदर   बना देती हूं ।”

यह कहकर उसने अपनी जादुई छड़ी घुमाई, राजा बंदर  बन गया । परी ने उसे एक पेड़ पर  छोड़ दिया । लेकिन तभी एक दूसरी परी वहां आ गई ।
उसने पहली परी से कहा : प्रिय सखी ”तुमने राजा को बंदर  बनाकर अच्छा नहीं किया ।
और वह ”पहली परी को लेकर जंगल में चली गयी और बोली देखो चारो तरफ कितने  सूंदर ,पशु पक्षी है  पर हमारी तरह बोल नहीं सकते । 
तुमने राजा को बंदर बनाकर उसे सजा तो  दे दि । पर वह भी अब बोल नहीं सकता । जब वह बोल नहीं पाएगा तो तुम कैसे समझ पाओगी  कि राजा अब परियों के बारे में अब क्या सोचता है ? हमें उसे फिर से राजा बनाकर पूछना चाहिए कि अब उसके  परियों के बारे में क्या ख्याल है ?”
दोनों परियां उस पेड़  के पास  गईं, जहां राजा बंदर  बना दूसरे बंदर के जुए  निकल निकल कर खा रहा था। 
पहली परी ने जादू की छड़ी हिलाई तो बंदर  बना राजा फिर से अपने रूप में आ गया । दूसरी परी ने अपनी जादुई छड़ी हिलाई तो राजा और  दोनों परियां आकाश में उड़ गईं ।
अब राजा आकाश में परियो के साथ खड़ा था , दोनों परियां उसके अगल-बगल खड़ी थी । राजा को बहुत डर लग रहा था । तभी दूसरी परी ने छड़ी हिलाई  और आसमान में एक भव्य संगमरमर का बहुत सुंदर महल बन गया परीया  राजा को लेकर महल में गई ।

उन्होंने राजा को एक खूबसूरत रत्नो से जड़े सिंहासन पर बैठाया ।  राजा बहुत खुश हुआ  ।  पहली परी ने फिर छड़ी हिलाई तो चारो तरफ खूबसूरत खुशबूदार गुलाब के रंग बिरंगे फूल खिल गए । दूसरी परी ने छड़ी हिलाई तो महल में पक्षी सुरीले गीत गाने लगे  ।
 पहली परी ने फिर  छड़ी घुमाई तो राजा के सामने तरह तरह के राजा के पसंद के भोजन और पकवान आ  गए  ,  राजा ने  भर पेट खाना खाया । राजा को ये अच्छी तरह समझ में आ गया था की परिया होती है और बहुत ही सुंदर नेक और दयालु  होती है 
राजा ने  परियों से कहा : “मैंने अपनी गलती मान  ली है । मुझे अब आपके अस्तित्व पर कोई शक  नहीं। 
परिया बहुत खुश हुयी , परी ने अपनी छड़ी फिर हिलाई तो  राजा धीरे धीरे नीचे उतरने लगा । और अपने महल में जहां वह सो रहा था, वहीं फिर से पहुंच  गया ।
राजा के रात भर गायब होने के बारे में किसी को भी पता ना चला।  
परियों ने  ‘आकाश महल’ राजा को उपहार में दे दिया 
 राजा ने उस महल का नाम रखा परी महल ।  
फिर उस आदमी को कैदखाने से निकल कर  उससे माफ़ी  मांगी और उसे बहुत सा इनाम भी दिया।

ईमानदार लकड़हारा

ईमानदार लकड़हारा ()
बहुत समय पहले की बात है, बहुत दूर एक गाँव में एक लकड़हारा रहता था. वह अपना काम बहुत मन लगा कर करता था और बहुत ही ईमानदार और मेहनती भी था ,दूर दूर तक ये प्रसिद्ध था की वह अपने ईमानदारी के धर्म से कभी नहीं हट सकता ,ये खबर भगवान तक भी पहुंच गयी थी ,और भगवान ने सोचा अवसर आने पर वो उसकी ईमानदारी की परीक्षा अवश्य लेंगे
वह रोज़ जंगल जाता कड़ी मेहनत करता ,और सुखी लकडिया काट कर बाज़ार में बेचा करता था ,उससे जो थोड़ा बहुत मिलता उसी से अपनी जीविका चलता था और खुश रहता था

एक दिन, वह नदी के तट पर लगे सूखे पेड़ की लकडिया काट रहा था  की अचानक उसे चक्क्र सा आया और उसकी कुल्हड़ी जो उसकी आजीविका की जान थी फिसल कर गहरी नदी में गिर गयी   नदी बहुत ही  गहरी थी इसलिए  लकडहारा  अपनी प्यारी  कुल्हाड़ी को बाहर नहीं निकाल सकता था. थी जो अब नदी में खो चुकी थी.  वह बहुत दुखी हो कर अपने परिवार और आजीविका के बारे में सोच सोच कर सच्चे मन से भगवान् से सहायता की प्रार्थना कर रहा था .
सच्चे और  ईमानदार लकड़हारे की प्रार्थना भगवान ने सुनी और सोचा की क्यों न इस विकट परिस्थिति में इस लकड़हारे की परीक्षा ली जाए
इसलिए भगवान ने उसके पास आकर पूछा, ” पुत्र ! क्यों परेशां हो मुझे क्यों पुकार रहे हो क्या समस्या हो गयी ? लकड़हारे ने अपनी सारी बात सारी  परेशानी भगवान को बताई और भगवान् से अपनी कुल्हड़ी वापस पाने में सहायता की गुहार करने लगा .

भगवान ने अपना हाथ उठाकर गहरी  नदी में डाला और चांदी की एक चमचमाती कुल्हाड़ी निकालकर लकड़हारे से पूछा, ” क्या यही है  तुम्हारी कुल्हाड़ी है ?
लकड़हारे ने उस कुल्हाड़ी को देखा और पुरे धर्य से बोला, ” नहीं.प्रभु ये तो मैंने कभी देखि भी नहीं
भगवान् ने सोचा इसे  इस से भी लालच देता हूँ और  भगवान ने अपना हाथ फिर से  पानी में डाला और एक और कुल्हाड़ी निकाली अबकी बार ये सोने की बनी हुई थी.
भगवान ने उससे पूछा, ” क्या यह है तुम्हारी कुल्हाड़ी  ?
लकड़हारे ने उस कुल्हाड़ी को अच्छी तरह देखा एक अपरिचित सी नज़र डाल के बोला, ” नहीं भगवान ! मई थ्र गरीब आदमी ऐसी कुल्हड़ी का तो मई सपना भी नहीं देखता ये भला मेरी कैसे हो सकती है
भगवान बोले, ” ज़रा गौर से  देखो , यह सोने की कुल्हाड़ी है जो बहुत ही कीमती है. क्या सच में यह तुम्हारी नहीं ?
लकड़हारा बोला, ” नहीं ! प्रभु यह मेरी कुल्हाड़ी नहीं है. ये मेरे किसी काम की नहीं मैं सोने की कुल्हाड़ी से पेड़ नहीं काट सकता, .
भगवान लकड़हारे की ईमानदारी देख क्र बहुत  प्रसन्न  हुए और उन्होंने मुस्कुरा के  अपना हाथ फिर से गहरी नदी में डाला और एक और कुल्हाड़ी निकाली. यह कुल्हाड़ी लोहे की थी। भगवान ने फिर लकडहारे से पूछा, ” यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है क्या ?
लकड़हारा कुल्हाड़ी देखकर बहुत खुश हुआ और श्रद्धापूर्वक हाथ जोड़ कर बोला बोला, ” जी हाँ, यही है मेरी कुल्हाड़ी है.
 भगवान लकड़हारे की ईमानदारी देखकर बहुत प्रसन्न  हुए. उन्होंने उसे वह लोहे की कुल्हाड़ी लौटा दी, साथ में उसे वो दो कुल्हाड़ी जो चांदी  और सोने की बनी  थी   ईमानदारी के लिए उसे  ईनाम में भी दे  दी.

जादुई बाल और सुनेहरा पक्षी

जादुई  बाल और सुनेहरा पक्षी 

एक राज्य में, एक बहुत  सुंदर राजकुमारी रहती थी। उसके दयालु स्वभाव से खुश हो कर लाल पारी ने उसे वरदान दिया की उसके बाल बहुत लम्बे और लाल रंग के होंगे और परी का पालतू सुनेहरा पक्षी रोज़ उसके पास आयेगा, और राज्य के लोगो के लिए जादुई धुन सुनाएगा ,और राजकुमारी के अच्छे  कर्मो के फल स्वरूप उसके बालो से प्रेम की लाल रौशनी आएगी , जिस से सब को शांति की नींद आएगी , और इसके कारण  राज्य की प्रगति होगी, और प्रेम बढ़ेगा. राजकुमारी को  गुलाब के फूलो से बहुत प्यार था , जिसके कारण सब उसे गुलाबी राजकुमारी कहते थे  ।राजकुमारी गुलाबी रोज़ शाम को महल की छत पर जाती  , और ज़ोर की ताली बजाती ,जिसे सुन कर महल की छत पर  पारी का  सुनहरे रंग का बहुत ही खूबसूरत पक्षी उड़ता हुआ आता ,  और उसके कंधे पर आ बैठता । और राजकुमारी के बाल चमकदार प्रेम की  लाल रौशनी से चमकने लगते  ।फिर  वह पक्षी जादुई धुन निकलता और राजकुमारी उस धुन पर सुरीला गीत जाती ,जिसे सुनते ही राज्य के सभी लोग मीठे मीठे सपनो में खो जाते  ,पूरी रात वे मीठे -मीठे सपने देखते और सुबह ख़ुशी और उत्साह से काम करते। इसी तरह कई वर्ष बीत गए ,राजकुमारी अपने देश के वासियो को सुलाने के लिए , रोज़ ही उस पक्षी की धुन पर गाना गाती और लोग मीठी नींद सोते। इसी तरह कई वर्ष बीत गए राज्य में सभी सुखी और प्रसन्न रहते थे  ,इसीलिए राज्य में धन धान्य की प्रगति भी होती जा रही थी। राज्य की सीमा के बाहर एक दुष्ट जादूगरनी रहती थी ,जो राज्य के लोगो के सुख शांति से रहने सेबहुत परेशां थी ,सो उसने गुलाबी राजकुमारी के ऊपर जादू कर दिया।जादूगरनी :"होइ गिल गिल बे बा बू  गुलाबी राजकुमारी के बाल काले कर तू "राजकुमारी के बालो का रंग तुरंत ही लाल से काला हो गया ,राजकुमारी को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था की वह अब  क्या करे ,इतनी देर में शाम हो गयी ,और राजकुमारी फिर से छत पर जा के ताली बजाने  लगी ,सुनहरा खूबसूरत पक्षी फिर रोज़ की तरह आ कर गुलाबी राजकुमारी के कंधे पर बैठ  , जादुई धुन सुनाने लगा और राजकुमारी के बालो से लाल के बदले बुराई की काली रौशनी निकलने लगी ,राजकुमारी ने उदास हो कर फिर गीत गया ,सब लोग सो गए पर आज सभी ने पूरी रात बुरे  बुरे सपने देखे। और दुःख और उदासी से काम ना कर सके. . गुलाबी राजकुमारी बहुत दुखी हुयी अगले दिन शाम को जब फिर सुनेहरा पक्षी आया तो उसने पूछा : हे सुनहरे सूरज के सामान दिव्य पक्षी! क्या मेरे बाल फिर से पहले की तरह नहीं हो सकते, क्या मेरे राज्य के लोग फिर पहले की तरह नहीं सो सकते ?जवाब में पक्षी ने कहा: "गुलाबी राजकुमारी गुलाब में डूब जाओ ,"और उड़ गया। राजकुमारी को कुछ भी समझ में नहीं आया फिर भी उसने एक बड़े टब में पानी भरवाया और उसमे गुलाब की पत्तियाँ डलवा दी और खुद उसमे जा कर बैठ गयी और अपने बालो को उसी पानी से धो भी लिया ,टब का सारा पानी काला हो गया और राजकुमारी के बाल फिर से पहले की तरह लाल हो गए  . अगली शाम फिर वो पक्षी आया और राजकुमारी के कंधे पर बैठ कर जादुई धुनसुनाने  लगा राजकुमारी के बाल पहले की तरह लाल रौशनी से चमक रहे थे ,राजकुमारी ने गण गया औरलोग चैन की नींद सो गए जैसे ही उस जादूगरनी को ये बात पता चली उसे बहुत गुस्सा उसने फिर जादू किया और बोली :जादूगरनी :"होइ गिल गिल बे बा बू  गुलाबी राजकुमारी के बाल काले कर तू "और फिर जादूगरनी ने राज्य में जितने भी गुलाब थे उन्हें अपने जादू से गायब कर दिया इधर जादूगरनी के जादू करते ही , बेचारी गुलाब राजकुमारी के बाल फिर से काले हो गए "और उदास राजकुमारी ने फिर शाम को सुनहरे पक्षी से  फिर इस जादू का तोड़ पूछा उसने फिर वो ही कहा पक्षी ने कहा: "गुलाबी राजकुमारी गुलाब में डूब जाओ ,और उड़ गया और उड़ गया। "राजकुमारी अब बहुत निराश हो गयी क्यूंकि जादूगरनी ने, राज्य के सारे गुलाबो को कही गायब कर दिया था ,राजकुमारी फुट -फुट कर रोने लगी ,उसकी आँखों से जैसे ही आंसू नीचे गिरा , वैसे ही महल की छत के नीचे एक खूबसूरत राजकुमार आ कर रुका और बोला :" प्यारी गुलाबी तुम अपने आंसुओ को बर्बाद मत करना ,क्यूंकि ये ही तुम्हे जादूगरनी के शाप से  मुक्ति दिलाएंगे। "उसने अपनी जेब से एक छोटी सी डिबिया निकाली और खोली ,उसमे एक लंबा सा लाल बाल था ,राजकुमार ने जमीन पर गिरा राजकुमारी का आंसू उठा के बाल पर रख दिया ,और तुरंत ही एकचमत्कार हुआ ,राजकुमारी का बाल खुद ही एक गुलाब में बदल गया राजकुमारी बहुत खुश हुयी। उसने ने तुरंत ही उस गुलाब की पत्तियों को पानी में डाल कर अपने बालो को धो लिया ,और बाल फिर पहले जैसे हो गए। सब राजकुमार को हैरानी से देखने लगे ,तब राजकुमार ने बताया की वो राजकुमारी के बचपन का साथी है और जब वह राज्य छोड़ कर जा रहा था तो उसने राजकुमारी से उसका एक बाल मांग कर निशानी के तौर  पर साथ रख लिया था ,राजकुमारी को भी अपना वो प्यारा दोस्त याद आ गया ,राजा ने खुश हो कर गुलाबी राजकुमारी और राजकुमार का विवाह करवा दिया। इस खबर से हर कोई खुश हो गया। और इस विवाह  में सुनहरे पक्षी ने फिर एक नई धुन सुनाई दूसरी तरफ यह जानने के बाद कि उसका शाप फिर से टूट गया है, दुष्ट जादूगरनी को इतना क्रोध आया की उसका सर हज़ारो  एक हजार छोटे टुकड़ों में फट गया। गुलाब के फूल एक बार फिर राज्य के हर बगीचे में उग आये इसके बाद हमेशा की तरह राजकुमारी सुनहरे पक्षी के साथ गीत गए कर लोगो को सुलाती रही और राज्य उनत्ति करता रहा।