परी का वरदान
एक समय की बात है ,उस समय आज की तरह तरह तरह की मिठाईया ,टॉफी ,चॉक्लेट आदि नहीं हुआ करते थे ,बच्चो की माँ ,दादी या नानी उनके लिए कुछ विभिन्न तरह की मिठाईया बनाया करती थी जिसे वह बहुत प्यार से खाते थे ,रामु की नानी भी उसके लिए खूब सारे लड्डू बनाया करती थी ,गोल मटोल मीठे मीठे लड्डू रामु को बहुत प्रिय थे और उनको खाने के लिए रामु नानी माँ की हर बात भी मान जाया करता था ,रामु के माता पिता बहुत पहले गांव में आये तूफान में मर चुके थे रामु के पास केवल अब नानी माँ ही बची थी।
एक बार नानी माँ बहुत बीमार हो गयी और कही बहार काम करने भी ना जा पायी जिस कारण से घर में खाने के लिए कुछ भी ना बचा ,आज रामु को बहुत भूख लग रही थी वह नानी माँ के पास जा कर भूख से रोने लगा नानी माँ ने कहा प्यारे बेटे रो मत बाहर खेत पर जा वहाँ जो भी मिले काट कर घर ले आ मैं तेरे लिए लड्डू जरूर बना दूंगी ,रामु नानी माँ की बात मान कर खेत की तरफ चल पड़ा कुछ आगे जाने पर उसे बड़ी बड़ी घास दिखाई दी ,रामु छोटा सा बचा था उसने सोचा की नानी माँ ने कहा है जो मिले ले आना तो क्यों न मैं इसे ही काट कर ले चलु और घास काटने लगा उसने काफी सारी घास काट ली ,वापस आते समय उसने देखा की एक बकरी अपने छोटे से बच्चे के लिए खाने को कुछ खोज रही है तो रामु ने कुछ ताज़ी घास उसे दे दी बकरी ने रामु को बहुत आशीर्वाद दिया,कुछ आगे जाने पर एक गाये मिली वो भी लचार दृष्टि से रामु की घास की तरफ देख रही थी क्यूंकि उसके पैर में घाव था और वो खाने को ढूढ़ने नहीं जा सकती थी ,रामु ने उसे भी कुछ घास दे दी ,अब उसके पास थोड़ी सी ही घास बची थी की उसने देखा की एक घोडा भी उदास सा बैठा है और उसके मालिक उसे बांध कर बिना खाना दिए ही कही चले गए थे , छोटे से दयालु रामु ने बची सारी घास उसे दे दी और चुप चाप नानी माँ के पास आ के बैठ गया ,नानी ने पूछा अरे तुझे कुछ मिला नहीं ,तो रामु ने उदास स्वर में कहा नानी माँ अब मुझे भूख नहीं लग रही और सो गयाऔर नानी माँ की भी उसी रात भूख और बिमारी से मृत्यु हो गयी.
अब रामु बहुत अकेला था। रामु की दयालुता एक परी बडे दिनों से देख रही थी उसने रामु को जगाया और अपनी गोद में बैठा कर भर पेट खाना खिलाया ,और कहा मैं तुम से बहुत प्रस्सन हूँ बोलो रामु तुम्हे क्या चाहिए ?रामु ने कहाँ परी माँ मुझे बस लड्डू चाहिए रोज़ ,पारी ज़ोर से हंसी और बोली प्यारे रामु तुम सिर्फ दयालु ही नहीं बहुत भोले भी हो मई तुमसे बहुत प्रस्सन हुई ,और तुम्हे पूर्ण संतुष्टि का वर देती हूँ दिन में एक बार जो चाहोगे हो जायेगा सबकी मदद करो ,पर किसी का बुरा चाहा तो ये वर हमेशा के लिए खतम हो जायेगा।
रामु बहुत खुश हुआ अगले ही दिन उसने कहा मेरी नानी माँ ठीक हो जाये और नानी माँ स्वस्थ हो गयी ,अगले दिन घर मांग लिया,फिर खिलोने ,कपड़े ,खाना इसतरह रोज़ ही कुछ मांगता रहता ,पर अब वह पहले जैसा नहीं रहा बहुत आलसी हो गया था ,किसी की इज़्ज़त नहीं करता ,किसी पर दया नहीं करता बस रात दिन कल क्या मांगना है सोचा करता ,एक बार एक गरीब आदमी अपने बच्चे को ले कर आया और बोला रामु तुंहरे पास सब कुछ है आज क्या तुम मेरे बेटे के लिए स्वस्थ मांग डोज वो बहुत बीमार है मेरे पास इलाज के लिए पैसे भी नहीं ,रामु ने तुरंत इंकार कर दिया और बोलै अरे नहीं आज तो मुझे हलवा खाने का मन है गर्म गर्म तूम जाओ यहाँ से भिखा री की तरह मांगो मत जा कर काम करो. कुछ ही देर में उस बच्चे की मौत हो गयी।
रामु कोई दुःख नहीं हुआ और उसने कहा मुझे गर्म गर्म गाजर का हलवा चाहिए बादाम वाला पर कुछ भी ना हुआ बार मांगने पर भी रामु को अब कुछ नहीं मिलता क्यूंकि परी के कहे अनुसार रामु ने किसी की मदद नहीं की इसलिए परी का वर हमेशा के लिए खत्म हो गया , और रामु को भी मांगने के सिवा और कुछ भी नहीं आता था इसलिए धीरे धीरे उसकी सारी सम्पति खत्म हो गयी और वह मांग मांग कर जिंदगी बिताने लगा।
इसलिए बच्चो जो म्हणत से मिले उसी को अपनाना चाहिए
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