Tuesday, 7 July 2020

हिरण की युक्तियाँ और सियार की हार


हिरण की युक्तियाँ और सियार की हार 

एक पहाड़ के किनारे एक  घना जंगल था। जंगल में कई तरह के जानवर रहते थे। एक दिन एक हिरण अपने दो बच्चो  के साथ घास खा रहा था। और बच्चे खुली हवा में  इधर-उधर खुशी से घूम रहे थे ।घूमते घूमते वे एक गुफा में घुस गए,उन्हें अंदर जाते देख हिरन भी अंदर आ गया ,अंदर जाते ही उसे  मालूम हुआ की ये एक शेर  की गुफा थी। गुफा के चारों ओर मरे हुए  जानवरों की हड्डियाँ थीं।हिरण बहुत डर गया पर भाग्य से, उस समय शेर गुफा के अंदर नहीं था।हिरण ने सोचा वे जल्दी से अपने बच्चो को ले कर वापस निकल जाए,वो अपने बच्चो  को गुफा से बाहर ले जाने की कोशिश कर ही रहा था की उसी  समय उसने एक तेज़ गुर्राने की आवाज़  सुनी। उसने देखा शेर कुछ दूरी पर ही था और गुफा की तरफ आ रहा था। अब गुफा से बाहर जाना खतरनाक था। उसने एक योजना बनायीं ,शेर गुफा के काफी  करीब आ गया था। हिरण ने अपनी आवाज़ को बहुत ऊँचा किया और चिल्लाया, “मेरे प्यारे छोटे  बच्चों  रोते नहीं हैं। हम मांसाहारी  है मुझे पता है तुम्हे शेर का मॉस पसंद है ,मैं तुम्हें खाने के लिए अभी ही एक शेर पकड़ कर दूंगा । तुम आज स्वादिष्ट भोजन करना ,पहले भी मैंने शेर की गुफा में घुस कर कितने शेर तुम्हे दिए है, शांत रहो वरना  शेर भाग जायेगा । ”
शेर  ने ये शब्द सुने तो  वह परेशान हो गया और दर कर  उसने खुद से कहा, “गुफा से वह अजीब आवाज किसकी है? मुझे पकड़ने के लिए कोई  खतरनाक जानवर अंदर घाट लगाए बैठा है ,बेहतर है मैं समय रहते ही यहाँ से भाग जाऊ। "
और ज़ोर से वापस भागने लगा ,उसे भागते देख गीदड़ बड़ा हैरान हुआ उसने शेर से पूछा  " हे जंगल राज़ आप इस तरह  डर से क्यों भाग रहे हैं?"शेर : ने कहा, "मेरे प्यारे गीदड़ , एक शक्तिशाली और भयंकर जानवर मेरी गुफा में रहने आया है। उसके बच्चो को शेर का मॉस अति प्रिय है वो  खाने के लिए शेर मांग रहे हैं। और उनके पिता ने उन्हें शेर देने का वडा किया है पहले भी वो कई शेर खा चुके है। " गीदड़ बहुत चालाक था ,वह समझ गया की जंगल में शेर को खाने वाला कोई भी जीव नहीं है ,और कोई जरूर शेर को मुर्ख बना रहा है ,तो वो बोलै चलिए मैं देखता हूँ और आपकी मदद करता हूँ ।लेकिन शेर ने कहा, “मैं कोई  मौका नहीं लेना चाहता। वो तो बस शेर को ही खाना चाहते है, मुझे मरने के लिए अकेला छोड़ तुम तो बच जाओगे और  मैं मारा जाऊँगा । इसलिए मैं तुम्हारे  साथ नहीं आऊंगा। "गीदड़ ने कहा, “मुझ पर विश्वास रखिये राजन ।  हम दोनों  अपनी पूंछ को एक साथ बाँध लेते है । फिर तो विश्वास हो जायेगा की मैं आपको छोड़ कर नहीं जा पाऊंगा। ”शेर गीदड़ की इस सलाह पर बेमन से मान गया। सियार ने उनकी पूंछ और अपनी पूंछ में एक पक्की गाँठ बाँध ली। और दोनों  एक साथ गुफा की ओर चले पड़े ।हिरण ने दूर से ही गीदड़ और शेर को साथ आते देखा ,उसे गीदड़ की छलकी समझ आ गयी,उसने फिर बूढी लगायी और  ,वो फिर अव्वाज़ को उठा कर ज़ोर से चिल्लाया “मेरे प्यारे बच्चों, मैंने अपने दोस्त, चतुर गीदड़ से, हमारे लिए एक शेर को पकड़ने के लिए प्रार्थना कि था। अब देखो गीदड़ ने हमारे लिए एक शेर पकड़ लिया है। और उसने शेर की पूंछ को अपनी पूंछ से बांध दिया है। कितना ाचा है मेरा दोस्त ,अब तो शेर भाग भी नहीं पायेगा ,और हम आराम से स्वदिष्ट शर को खा लेंगे। "शेर  ने यह सुना, वह चौंक गया। उसे यकीन आ गया था की गीदड़  ने उसे धोखा दिया है । इसलिए, शेर ने खुद को अपनी गुफा के अंदर खड़े भयानक जानवर से बचाने का फैसला कर  लिया। और वापस  दौड़ना शुरू किया। वह गीदड़ के बारे में भूल गया।  गीदड़ शेर से बंधा बंधा चट्टानों और कांटों पर शेर के साथ खींचता हुआ जाने लगा , । बिना सोचे समझे शेर के  भागने के कारण गीदड़  दो चट्टानों के बीच फंस गया। शेर ने सोचा की खतरनाक जानवर ने उसे पकड़ लिया है सो शेर ने  अपनी सारी शक्ति लगा के गीदड़ को  साथ खींच लिया। जिससे शेर की उसकी पूंछ कट गई। और सियार मारा गया। बिना पूंछ शेर शर्म से  जंगल के दूसरे हिस्से में भाग गया।
और हिरण अपने बच्चो के साथ आराम से शेर की गुफा से बाहर निकल आया । वे अपने झुंड में सुरक्षित रूप से शामिल हो गए।

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