जादुई बीन
वैभव का नाम वैभव जरूर था पर वह एक छोटे से गांव बड़ी ही गरीबी का जीवन बीता रहा था ,चौबीस घंटे काम करने के बावजूद बड़ी मुश्किल से वह अपने और अपने माता पिता के लिए पेट भरने योग्य धन कमा पाता ,एक बार जब वह घर के लिए लकडिया काटने के लिए जंगल की और जा रहा था तो उसने देखा पहाड़ के पीछे बने सरोवर में बहुत से कमल के फूल खिले हुए है और ,एक लड़की वही पर बैठ कर बीन बाज़ा रही है और चारो तरफ से तरह तरह के सांप बहार निकल कर बीन की आवाज़ पर नाच रहे है और उस लड़की को ज़रा सा भी डर नहीं लग रहा ,वैभव ने सोचा मैं ही जा कर लड़की को बचा लेता हूँ वरना कोई ना कोई सांप उसे जरूर काट लेगा। और जल्दी जल्दी पहाड़ की उस ओर जाने लगा ,और जैसे ही लड़की के नज़दीक पंहुचा सारे सांप गायब हो गए और वैभव ने देखा लड़की के बड़े ही सुंदर पंख थे जिस द्वारा लड़की भी तुरंत ही आसमान में उड़ कर ओझल हो गयी ,पर लड़की की बीन वही छूट गयी ,
वैभव ने सोचा अगर बीन यही छोड़ दू तो आधी पानी बरसात मे जरूर खराब हो जाएगी इसलिए वो बीन और काटी हुयी लकडिया ले कर घर आ गया। और बीन को भी लकड़ियों के साथ रख थका हारा खाना खा कर सोने चला गया आधी रात को बीन की अव्वाज़ से उसकी आँख खुली तो व हैरान हो गया ,उसी के घर वह लड़की फिर से बीन बाज़ा रही थी और सभी सांप आस पास नाच रहे थे ,तभी उसकी नज़र पास ही रखे लड़की के पंखो पर पड़ी उसने चुपचाप पंखो को छुपा दिया। कुछ देर बीन बजाने के बाद लड़की ने सांपो को इशारा किया सब चले गए और लड़की भी जाने के लिए अपने पंख खोजने लगी पंख ना मिलने पर वह ज़ोर ज़ोर से रोने लगी ,ये देख कर वैभव तुरंत बाहर आया और उससे रोने का कारन पूछने लगा परी बलि मैं नाग परी हूँ मेरा काम है रोज़ बीन बाज़ा कर सांपो का मनोरंजन करना और वापस परी लोक जाना यदि मैं एक दिन भी नहीं गयी तो ये सभी सांप मुझे डस लेंगे वैभव ने तुरंत परी के पंख वापस कर दिए पारी ने वैभव को आशीर्वाद दिया और कहा देखो वैभव तुम बहुत दयालु हो आज के बाद मैं रोज़ यहाँ बीन बजाऊंगी और बदले में तुम्हे एक सोने की मोहर दूंगी और तुम्हे ये राज़ अपने तक ही रखना होगा और तुम्हे और तुहरे परिवार को ,कभी सांपो से दर नहीं होगा वैभव के हाथ पर मोहर रख कर चली गयी।
वैभव ने सुबह ही मोहर अच्छे दामों में बेच दी धीरे धीरे मोहरे बेच कर वैभव आराम से जिंदगी बिताने लगा ,और पुरे दिन बिना मेहनत उसे मोहर मिल जाती जिसे वो बेच देता ,पर उसने अपनी कसम कभी नहीं तोड़ी और परी जहा बीन बजती उस जगह को दीवार से घेरवा दिया ताकि कोई देख न सके और दूसरी तरफ रहने लगा उसने किसी को परी और बीन का राज़ नहीं बताया , बहुत सालो के बाद एक दिन जब वैभव अपने घर ना था तो पत्नी को रात में बीन की आवाज़ आयी और वह उस तरफ चली गयी जहा जाना वैभव ने मना किया था, उसकी पत्नी ने जब इतनी सूंदर स्त्री को बीन बजाते देखा तो वह बहुत दर गयी ,उसने सोचा इतनी सुंदर स्त्री को यदि मेरे पति ने पसंद किया तो मेरा क्या होगा , जरूर इस बीन के कारन ये यहाँ आयी है मैं इस बीन को ही जला देती हूँ ,और बिना कुछ सोचे समझे बीन को जलाने लगी बीन के जलाने की कोशिश करते ही चारो तरफ से सांप निकलने लगे और उन्होंने वैभव की पत्नी को डस लिया ,और बीन को वापस उसकी जगह रख दिया और चले गए ,वैभव घर आया तो अपनी पत्नी को ऐसी हालत में देख रोने लगा और बीन बजाने लगा ,तुरंत परी वह आ गयी और उसने वैभव की पत्नी को तो ठीक कर दिया पर हमेशा के लिए वैभव के घर से बीन के साथ चली गयी।
और वैभव फिर से पुराना जीवन बिताने लगा।
वैभव का नाम वैभव जरूर था पर वह एक छोटे से गांव बड़ी ही गरीबी का जीवन बीता रहा था ,चौबीस घंटे काम करने के बावजूद बड़ी मुश्किल से वह अपने और अपने माता पिता के लिए पेट भरने योग्य धन कमा पाता ,एक बार जब वह घर के लिए लकडिया काटने के लिए जंगल की और जा रहा था तो उसने देखा पहाड़ के पीछे बने सरोवर में बहुत से कमल के फूल खिले हुए है और ,एक लड़की वही पर बैठ कर बीन बाज़ा रही है और चारो तरफ से तरह तरह के सांप बहार निकल कर बीन की आवाज़ पर नाच रहे है और उस लड़की को ज़रा सा भी डर नहीं लग रहा ,वैभव ने सोचा मैं ही जा कर लड़की को बचा लेता हूँ वरना कोई ना कोई सांप उसे जरूर काट लेगा। और जल्दी जल्दी पहाड़ की उस ओर जाने लगा ,और जैसे ही लड़की के नज़दीक पंहुचा सारे सांप गायब हो गए और वैभव ने देखा लड़की के बड़े ही सुंदर पंख थे जिस द्वारा लड़की भी तुरंत ही आसमान में उड़ कर ओझल हो गयी ,पर लड़की की बीन वही छूट गयी ,
वैभव ने सोचा अगर बीन यही छोड़ दू तो आधी पानी बरसात मे जरूर खराब हो जाएगी इसलिए वो बीन और काटी हुयी लकडिया ले कर घर आ गया। और बीन को भी लकड़ियों के साथ रख थका हारा खाना खा कर सोने चला गया आधी रात को बीन की अव्वाज़ से उसकी आँख खुली तो व हैरान हो गया ,उसी के घर वह लड़की फिर से बीन बाज़ा रही थी और सभी सांप आस पास नाच रहे थे ,तभी उसकी नज़र पास ही रखे लड़की के पंखो पर पड़ी उसने चुपचाप पंखो को छुपा दिया। कुछ देर बीन बजाने के बाद लड़की ने सांपो को इशारा किया सब चले गए और लड़की भी जाने के लिए अपने पंख खोजने लगी पंख ना मिलने पर वह ज़ोर ज़ोर से रोने लगी ,ये देख कर वैभव तुरंत बाहर आया और उससे रोने का कारन पूछने लगा परी बलि मैं नाग परी हूँ मेरा काम है रोज़ बीन बाज़ा कर सांपो का मनोरंजन करना और वापस परी लोक जाना यदि मैं एक दिन भी नहीं गयी तो ये सभी सांप मुझे डस लेंगे वैभव ने तुरंत परी के पंख वापस कर दिए पारी ने वैभव को आशीर्वाद दिया और कहा देखो वैभव तुम बहुत दयालु हो आज के बाद मैं रोज़ यहाँ बीन बजाऊंगी और बदले में तुम्हे एक सोने की मोहर दूंगी और तुम्हे ये राज़ अपने तक ही रखना होगा और तुम्हे और तुहरे परिवार को ,कभी सांपो से दर नहीं होगा वैभव के हाथ पर मोहर रख कर चली गयी।
वैभव ने सुबह ही मोहर अच्छे दामों में बेच दी धीरे धीरे मोहरे बेच कर वैभव आराम से जिंदगी बिताने लगा ,और पुरे दिन बिना मेहनत उसे मोहर मिल जाती जिसे वो बेच देता ,पर उसने अपनी कसम कभी नहीं तोड़ी और परी जहा बीन बजती उस जगह को दीवार से घेरवा दिया ताकि कोई देख न सके और दूसरी तरफ रहने लगा उसने किसी को परी और बीन का राज़ नहीं बताया , बहुत सालो के बाद एक दिन जब वैभव अपने घर ना था तो पत्नी को रात में बीन की आवाज़ आयी और वह उस तरफ चली गयी जहा जाना वैभव ने मना किया था, उसकी पत्नी ने जब इतनी सूंदर स्त्री को बीन बजाते देखा तो वह बहुत दर गयी ,उसने सोचा इतनी सुंदर स्त्री को यदि मेरे पति ने पसंद किया तो मेरा क्या होगा , जरूर इस बीन के कारन ये यहाँ आयी है मैं इस बीन को ही जला देती हूँ ,और बिना कुछ सोचे समझे बीन को जलाने लगी बीन के जलाने की कोशिश करते ही चारो तरफ से सांप निकलने लगे और उन्होंने वैभव की पत्नी को डस लिया ,और बीन को वापस उसकी जगह रख दिया और चले गए ,वैभव घर आया तो अपनी पत्नी को ऐसी हालत में देख रोने लगा और बीन बजाने लगा ,तुरंत परी वह आ गयी और उसने वैभव की पत्नी को तो ठीक कर दिया पर हमेशा के लिए वैभव के घर से बीन के साथ चली गयी।
और वैभव फिर से पुराना जीवन बिताने लगा।
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