Tuesday, 7 July 2020

चालक खरगोश

चालक खरगोश
एक लोमड़ी घने जंगल मे कुछ खाने के लिए ढूंढ़ रही थी दूर दूर तक खाने के लिए कुछ भी नहीं था ,की अचानक उसे  एक  खरगोश दिखायी पड़ा ,लोमड़ी खरगोश को खाने के लिए युक्तियां सोंचने लगीं
लोमडी -ऐ ख़रगोश भाईं इस घने जंगल में तुम्हे देख कर प्रसन्ता हुयी ,तुम तो  बहुत बहादुर दीखते हो आशा है मुझे बचा लोगे ,मुझे अकेले बहुत डर लग रहा था।
खरगोश -अरे मैं एक छोटा सा खरगोश हूँ तुम भला मुझे अपना रक्षक कैसे समझ सकती हो।
लोमड़ी -भाई काफी दिनों से मैं बीमार हूं देखो ,मेरी नब्ज़ भी धीमी चल रही है।
खरगोश -मन ही मन में  (ओहो तो तुम मुझे खाना चाहती हो ,अब मैं इतना भोला भी नहीं अभी मज़ा चखाता हूँ )लोमड़ी -देखो भाई मुझे बहुत प्यास लग रही है क्या तुम मुझे कुछ पानी ला दोगे
लोमड़ी ने सोचा खरगोश के पानी के पास जाते ही उसे पंजो में दबा कर मार दूंगी फिर उसका नरम मांस खा कर भूख शांत करुँगी और फिर मीठा ठंडा पानी पी वही विश्राम भी कर लुंगी  .
खरगोश को भी प्यास लगी हुयी थी सो खरगोश लोमड़ी की बात बमान कर सावधानी से पानी की और जाने लगा ,पानी के पास ही उसे आह्ट सुनाई दी ये आह्ट जंगल के राजा शेर की थी जो खरगोश पर झपटा मारने ही वाला था ,की खरगोश हाथ जोड़ के बोला ,
खरगोश -महाराज मैं नन्ही सी जान भला मुझे मार के आपका पेट कहा भरेगा और मुफ्त में पाप के भागी बनेगे ,आप जंगल के न्यायी राजा है अगर आप मुझे और मेरे परिवार को सदैव के लिए अभय दान दे तो आपके लिए अभी ही पेटभर भोजन का इंतज़ाम करता हूँ।
शेर -अच्छा तुम क्या इंजाम करोगे तुम्हे और तुम्हारे परिवार को छोड़ता हूँ ,इस ठण्ड में मेरा परिवार और मैं भूख से मर रहे है ,जल्दी बताओ आज के बाद तुम्हारी रक्षा की जिम्मेदारी मेरी।
खरगोश -महाराज एक लोमड़ी काफी देर से मुझे खाने के लिए अवसर तलाश कर रही है ,मेरे आवाज़ देते ही वो मुझे खाने आएगी ,उसी समय आप उस पापी लोमड़ी को दंड दे और मुझे बचा ले ,आपका पेट भी भर जायेगा और महाराज का न्याय भी बचा रहेगा।
शेर राज़ी हो गया उधर लोमड़ी भी भूख से परेशां खर्गोश्का इंतज़ार कर रही थी
खरगोश -बहन लोमड़ी जल्दी आओ अपनी प्यास बुझाओ बहुत ही मीठा पानी है
लोमड़ी -बस वही रुको ,तुम पानी पियो मैं आती हूँ कह कर। भगती हुयी खरगोश के पास पहुंची ,जैसे ही खरगोश पानी पीने को झुका वो उसको दबोचने के लिए उछली और उसके उछलते ही शेर ने उसे अपने जबड़ो में पकड़ लिया।
शेर की जय जय कार होने लगी ,शेर ने एक निरीह जीव की रक्षा की थी ,शेर का पेट भर गया और खरगोश भी अपनी बुद्धि और चतुराई से अपने आपको और अपने परिवार  को ,शेर और लोमड़ी दोनों से ही बचाने में कामयाब हुआ।
इसीलिए विपरीत परिस्थितियों में भी धर्य नहीं छोड़ना चाहिए .





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