दो चेहरेवाली रानी
विचित्र वर्धन, शेषाद्रि नगर का बडा ही लोक प्रिय राजा था और अपने न्याय के लिए दूर दूर तक प्रसिद्ध था ,
विचित्र वर्धन को शिकार करने का बड़ा शौक़ था ,और अक्सर शिकार के लिए कई प्रदेशो के राजाओ को बुला कर दूर दूर के जंगलो में शिकार के लिए जाया करता था , और शिकारी राजा के नाम से प्रसिद्ध था ,एक बार जब उसे पता चला की उसकी पत्नी शीघ्र ही राज्य को एक वारिस देने वाली है यानि माँ बनने वाली है तो उसने राज्य के खजाने को खोल कर जी भर के दान किया। और फिर जब उसके मंत्रियो ने देखा की अधिकांश खज़ाना राजा के दान पुण्य के कारण खाली हो गया है ,और राजा भी शिकार के लिए शहर से बहार है बिना राजा से पूछे ,प्रजा पर मनमाना टैक्स लगा कर ख़ज़ाने को फिर भरने की योजना बनायीं और राजा से शबाशी पाने का प्रयत्न किया।
राजा के वापस आने पर मंत्रियो ने राजा को खजानज वापस भरने की सुचना दी और बहुत शाबाशी और इनाम पाया , दूसरी तरफ प्रजा टैक्स की ये दोहरी मार सह नहीं पायी और राजा को बद्दुआए देने लगी ,और जब राजा ने नगर की सीमा पर रहने वाली बुढ़िया के बेटे से टैक्स के बारे में पूछताछ शुरू की ,तो उस गरीब ने पैसे ना होने के कारण शर्म से आत्महत्या कर ली ,बुढ़िया बेचारी अनाथ हो गयी जवान बेटे की मृत्यु से दुखी बुढ़िया ने राजा को शाप दिया की : हे राजा तू जिस प्रकार एक ओर प्रजा को दान देता है ,और दूसरी ओर दुगने टैक्स लगा के उन्हें दर्द देता है ,इस दोहरे चरित्र के कारण तेरी होने वाली संतान के दो चेहरे होंगे एक दयालु और एक निर्दयी ,जिसके कारण तू कभी चैन से नहीं जी पायेगा। "
सही समय आने पर रानी ने एक बेटी को जन्म दिया जिसके दो सर थे एक चेहरा बहुत सूंदर दूसरा बहुत भयानक ,सारी प्रजा में ये खबर फ़ैल गयी ,समय के साथ साथ राजकुमारी बड़ी होने लगी पर विचित्र बात यह थी की वो एक सर से तो सबका आदर करती और दूसरे सर से तुरंत अपमान ,एक तरफ से सहायता तो दूसरी तरफ से उनको चोट पहुंचने का कारण ,उसे कोई पसंद ना करता और राजा उसके भविष्य की चिंता में बहुत परेशां रहने लगा ,एक बार राजकुमारी भी पिता के साथ शिकार गयी पर रास्ता भटक जाने के कारण घने जंगल में खो गयी ,जहा दूर उसे एक घायल बूढी स्त्री दिखाई दी जो अपनी आखिरी साँसे ले रही थी ,राजकुमारी ने अपने भयानक चेहरे को कपडे से छुपा रखा था ,पास ही बने एक पुराने खंडहर में उस स्त्री को ला राजकुमारी ने उसकी बहुत सेवा की अब बूढी स्त्री स्वस्थ हो गयी और उसने राजकुमारी से अपने चेहरे से पर्दा हटाने को कहा ,राजकुमारी के मना करने पर भी वो ना मानी ,आखिर राजकुमारी को पर्दा हटाना ही पड़ा पर राजकुमारी का वो भयानक चेहरा देख कर बहुत डर गयी ,
और उस दूसरे चहरे ने उससे कहा :बुढ़िया मैं राजकुमारी हूँ ,इतने दिनसे मुझसे सेवा करवा रही है अब तुझे राजा के कोप का भाजन बनना होगा। "
पहले चेहरे ने कहा :नहीं नहीं माँ तुम आराम करो मैं तुम्हारी देख भाल करुँगी। "
बुढ़िया सोचने लगी की कही ये वही राजकुमारी तो नहीं जो मेरे शाप देने के कारण पैदा हुयी ,पूछने पर पता चला की ये वो ही हाउ ,बुढ़िया को बहुत पश्चाताप हुआ। और उसने अपनी इस गलती को ठीक करने के लिए भगवान से बहुत माफ़ी मांगी। पर राजकुमारी के दूसरे चहरे के प्रभाव में राजकुमारी ने बुढ़िया की ठीक तरह से सेवा करने के बाद अपनी तलवार से उसका गला काट डाला।
और अपने राज्य वापस चली गयी राजा ने मुनादी करवा दी की जो मेरी विवाह करेगा वही अगला राजा होगा पर राजकुमारी के दो चेहरों के कारण कोई आगे ना आया आखिर में राजा ने राजकुमारी को धनुष विद्या सिखने जंगल में एक गुरु के पास भेज दिया ,कुछ दिनों के बाद एक जादूगर वह आया और गुरु को मार कर
राजकुमारी को अपने जादू से बाँध दिया और उसे अपनी सेविका बना कर रहने लगा , एक बार जब जादूगर नहीं था राजकुमारी का जादू टूट गया और वो जंगल की और भाग गयी वहा उसने एक भयंकर शेर को एक बच्चे पर वार करते देखा और दूसरे चेहरे की शक्ति के क्रोध और साहस से शेर को मार गिराया ,तभी एक परी आयी और राजकुमारी को आशीर्वाद देने लगी :राजकुमारी ये मेरा बेटा है जिसकी तुमने रक्षा की है मैं तुम्हे वरदान देती हूँ की ,तुम सर्वशक्तिशाली बनोगी और तुम्हारा कुरूप चेहरा अपने बुरे गिनो के साथ मिट जायेगा।
और ये ही हुआ राजकुमारी एक चहरे वाली खूबसूरत युवती बन गयी , और जंगल में शिकार करने आये एक राजकुमार ने उसकी सुंदरता देखते ही उससे विवाह कर लिया। और वो ख़ुशी से रहने लगे।
विचित्र वर्धन, शेषाद्रि नगर का बडा ही लोक प्रिय राजा था और अपने न्याय के लिए दूर दूर तक प्रसिद्ध था ,
विचित्र वर्धन को शिकार करने का बड़ा शौक़ था ,और अक्सर शिकार के लिए कई प्रदेशो के राजाओ को बुला कर दूर दूर के जंगलो में शिकार के लिए जाया करता था , और शिकारी राजा के नाम से प्रसिद्ध था ,एक बार जब उसे पता चला की उसकी पत्नी शीघ्र ही राज्य को एक वारिस देने वाली है यानि माँ बनने वाली है तो उसने राज्य के खजाने को खोल कर जी भर के दान किया। और फिर जब उसके मंत्रियो ने देखा की अधिकांश खज़ाना राजा के दान पुण्य के कारण खाली हो गया है ,और राजा भी शिकार के लिए शहर से बहार है बिना राजा से पूछे ,प्रजा पर मनमाना टैक्स लगा कर ख़ज़ाने को फिर भरने की योजना बनायीं और राजा से शबाशी पाने का प्रयत्न किया।
राजा के वापस आने पर मंत्रियो ने राजा को खजानज वापस भरने की सुचना दी और बहुत शाबाशी और इनाम पाया , दूसरी तरफ प्रजा टैक्स की ये दोहरी मार सह नहीं पायी और राजा को बद्दुआए देने लगी ,और जब राजा ने नगर की सीमा पर रहने वाली बुढ़िया के बेटे से टैक्स के बारे में पूछताछ शुरू की ,तो उस गरीब ने पैसे ना होने के कारण शर्म से आत्महत्या कर ली ,बुढ़िया बेचारी अनाथ हो गयी जवान बेटे की मृत्यु से दुखी बुढ़िया ने राजा को शाप दिया की : हे राजा तू जिस प्रकार एक ओर प्रजा को दान देता है ,और दूसरी ओर दुगने टैक्स लगा के उन्हें दर्द देता है ,इस दोहरे चरित्र के कारण तेरी होने वाली संतान के दो चेहरे होंगे एक दयालु और एक निर्दयी ,जिसके कारण तू कभी चैन से नहीं जी पायेगा। "
सही समय आने पर रानी ने एक बेटी को जन्म दिया जिसके दो सर थे एक चेहरा बहुत सूंदर दूसरा बहुत भयानक ,सारी प्रजा में ये खबर फ़ैल गयी ,समय के साथ साथ राजकुमारी बड़ी होने लगी पर विचित्र बात यह थी की वो एक सर से तो सबका आदर करती और दूसरे सर से तुरंत अपमान ,एक तरफ से सहायता तो दूसरी तरफ से उनको चोट पहुंचने का कारण ,उसे कोई पसंद ना करता और राजा उसके भविष्य की चिंता में बहुत परेशां रहने लगा ,एक बार राजकुमारी भी पिता के साथ शिकार गयी पर रास्ता भटक जाने के कारण घने जंगल में खो गयी ,जहा दूर उसे एक घायल बूढी स्त्री दिखाई दी जो अपनी आखिरी साँसे ले रही थी ,राजकुमारी ने अपने भयानक चेहरे को कपडे से छुपा रखा था ,पास ही बने एक पुराने खंडहर में उस स्त्री को ला राजकुमारी ने उसकी बहुत सेवा की अब बूढी स्त्री स्वस्थ हो गयी और उसने राजकुमारी से अपने चेहरे से पर्दा हटाने को कहा ,राजकुमारी के मना करने पर भी वो ना मानी ,आखिर राजकुमारी को पर्दा हटाना ही पड़ा पर राजकुमारी का वो भयानक चेहरा देख कर बहुत डर गयी ,
और उस दूसरे चहरे ने उससे कहा :बुढ़िया मैं राजकुमारी हूँ ,इतने दिनसे मुझसे सेवा करवा रही है अब तुझे राजा के कोप का भाजन बनना होगा। "
पहले चेहरे ने कहा :नहीं नहीं माँ तुम आराम करो मैं तुम्हारी देख भाल करुँगी। "
बुढ़िया सोचने लगी की कही ये वही राजकुमारी तो नहीं जो मेरे शाप देने के कारण पैदा हुयी ,पूछने पर पता चला की ये वो ही हाउ ,बुढ़िया को बहुत पश्चाताप हुआ। और उसने अपनी इस गलती को ठीक करने के लिए भगवान से बहुत माफ़ी मांगी। पर राजकुमारी के दूसरे चहरे के प्रभाव में राजकुमारी ने बुढ़िया की ठीक तरह से सेवा करने के बाद अपनी तलवार से उसका गला काट डाला।
और अपने राज्य वापस चली गयी राजा ने मुनादी करवा दी की जो मेरी विवाह करेगा वही अगला राजा होगा पर राजकुमारी के दो चेहरों के कारण कोई आगे ना आया आखिर में राजा ने राजकुमारी को धनुष विद्या सिखने जंगल में एक गुरु के पास भेज दिया ,कुछ दिनों के बाद एक जादूगर वह आया और गुरु को मार कर
राजकुमारी को अपने जादू से बाँध दिया और उसे अपनी सेविका बना कर रहने लगा , एक बार जब जादूगर नहीं था राजकुमारी का जादू टूट गया और वो जंगल की और भाग गयी वहा उसने एक भयंकर शेर को एक बच्चे पर वार करते देखा और दूसरे चेहरे की शक्ति के क्रोध और साहस से शेर को मार गिराया ,तभी एक परी आयी और राजकुमारी को आशीर्वाद देने लगी :राजकुमारी ये मेरा बेटा है जिसकी तुमने रक्षा की है मैं तुम्हे वरदान देती हूँ की ,तुम सर्वशक्तिशाली बनोगी और तुम्हारा कुरूप चेहरा अपने बुरे गिनो के साथ मिट जायेगा।
और ये ही हुआ राजकुमारी एक चहरे वाली खूबसूरत युवती बन गयी , और जंगल में शिकार करने आये एक राजकुमार ने उसकी सुंदरता देखते ही उससे विवाह कर लिया। और वो ख़ुशी से रहने लगे।
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