APRIL SRI SANSA
जादुई गुड़िया और राजकुमार
काफी समय पहले की बात है, एक राजा अपने राजकुमार के साथ ख़ुशी से रहा करता था., पर राजकुमार की माँ बचपन में ही चल बसी थी, और राजकुमार के साथ में कोई संगी साथी या भाई बहन ना होने के कारण राजकुमार बहुत ज़िद्दी हो गया था , और अकारण ही जिद करता रहता था ,साथ ही कोई दोस्त न होने के कारण बहुत उदास भी रहता था । उसकी उदासी राजा से देखी ना जाती , और वह किसी तरह भी अपने लाडले बेटे की उदासी दूर करना चाहता था ,एक बार किसी विशेष काम के लिए राजा को विदेश जाना पड़ा ,उसने राजकुमार से पूछा :”मेरे प्यारे बेटे तुम्हे क्या चाहिए?
बेटे ने कहा :"पिताजी मेरे पास ढेरो खिलौने है पर वे सब किसी काम के नहीं एक बोलने वाली गुडिया चाहिए . और ज़िद्दी स्वर में बोला :-“यदि मुझे आपने बोलनेवाली गुड़िया मुझे जल्दी ना ला कर दी तो मैं खाना पीना सब छोड़ दूंगा "
बेचारा राजा पहले तो सोच में पड़ गया की भला बोलनेवाली गुड़िया कहा मिलेगी फिर उसने राज्य में मुनादी करवा दिया की :-",जो मेरे बेटे को बोलने वाली गुड़िया ला के देगा उसे मैं मुँह माँगा इनाम दूंगा ,सब लोग खोज में लग गए की भला राजकुमार के लिए बोलनेवाली गुड़िया कहा मिलेगी ?
फिर एक दिन राजा के दरबार में सिपाही ने आ कर बताया की :"महाराज एक भिखारिन बाहर खड़ी है और कह रही है की वह राजकुमार के लिए बोलनेवाली गुड़िया ला सकती है। "
राजा ने तुरंत आदेश दिया : जाओ तुरंत उसे आदर से अंदर लाओ "
सिपाही :"जी महाराज,"
कह कर बाहर चला गया और बुढ़िया को ले अंदर आ गया , बुढ़िया का चेहरा बहुत ही भयंकर था , और कपड़े फटे हुए थे शरीर से आने वाली बदबू से पूरे दरबारियों का सांस लेना भी मुश्किल हो गया ,
फिर भी राजा ने आदर सहित बुढ़िया को बैठने का स्थान दिया और बोला: "बोलो माँ क्या तुम्हारे पास बोलने वाली गुड़िया है?"
बुढ़िया बोली: "राजा तुम बहुत दयालु हो और सभी का आदर भी करते हो ,मैं तुम्हे बोलनेवाली गुड़िया दे सकती हूँ ,पर इसके लिए राज्य के किसी एक समझदार युवती की बलि देनी होगी यदि तुम तैयार हो तो मैं ये काम आज ही कर सकती हूँ।"
राजा अपनी प्रजा को भी अपने बच्चो की भांति ही प्यार करता था ,वो सोच में पड़ गया की, भला राजकुमार के लिए किसी की जान लेना कहाँ तक उचित है ? पर राजा की प्रजा भी राजा और राजकुमार को बहुत प्यार करती थी इसलिए मंत्री का बेटी स्वयं राजकुमार के लिए बलि देने को तैयार हो गयी ,और राजा के बहुत मना करने पर भी ना मानी सो राजा को ही मानना पड़ा ,भिखारिन मंत्री की बेटी को ले कर चली गयी और कुछ समय बाद हाथ में एक खूबसूरत सी दिखनेवाली गुड़िया को ले कर आ गयी।
राजा को देखते ही गुड़िया बोली : प्रणाम महाराज मैं राजकुमार की गुड़िया हूँ , दया कर मुझे राजकुमार के पास पंहुचा दे।
राजा बहुत खुश हुआ और गुड़िया को राजकुमार के पास पंहुचा दिया गया ,अब राजकुमार बहुत खुश रहने लगा सोते जागते ,खाते पीते ,रोते हँसते अब उसे गुड़िया के सिवा किसी का होश ना रहता वो बहुत खुश रहता ,देखते देखते राजकुमार विवाह के योग्य हो गया , और राजा उसके लिए वधू खोजने लगा ,पर राजकुमार की एक ही शर्त थी पहले वह अपनी गुड़िया का विवाह कर के ही अपना विवाह करना चाहता था ,अब भला बोलने वाला गुड्डा कहा से मिलता ?
फिर बूढी भिखारिन की खोज हुयी और वो मिल भी गयी उसने हँसते हुए कहा: ठीक है राजन तुम्हे बोलने वाला गुड्डा भी मिल जायेगा और विवाह भी हो जायेगा ,पर ये विवाह राजकुमार नहीं देख सकता ,और राजकुमार को इतने दिन मेरे घर रहना होगा राजकुमार मान गया ।
बुढ़िया राजकुमारी को ले अपने घर गयी और कुछ ही मिनटो में खूबसूरत बोलनेवाला गुड्डा ली के आ गयी और शीघ्र ही रीतिरिवाज़ के अनुसार उनकी शादी भी करवा दी गयी।
अब राजा ने सोचा की राजकुमार वापस आ जाएगा पर वो नहीं आया ,अब राजा बहुत परेशां हुआ और बूढी भिखारिन से दया की भीख मांगने लगा ,
भिखारन तुरंत ही परी के रूप में आ गयी और बोली: राजन मैं तुम्हारी परीक्षा ले रही थी ,मंत्री की बेटी ही बोलनेवाली गुड़िया है ,और राजकुमार का गुड्डे के रूप में गुड़िया से विवाह भी हो चूका है ,पर राजकुमार की इस तरह की ज़िद के कारण अब राजकुमार को गुड्डे का जीवन बिताना होगा और मंत्री की पुत्री को गुड़िया का और जब इनके बच्चे होंगे तो ये अपने पहले वाले रूप में आएंगे “
और गायब हो गयी ,समय के साथ उनका एक पुत्र हुआ और वे वापस अपने रूप में आ गए और राजकुमार ने कभी ज़िद न करने की प्रतिज्ञा की और सुख से रहने लगे।
जादुई गुड़िया और राजकुमार
काफी समय पहले की बात है, एक राजा अपने राजकुमार के साथ ख़ुशी से रहा करता था., पर राजकुमार की माँ बचपन में ही चल बसी थी, और राजकुमार के साथ में कोई संगी साथी या भाई बहन ना होने के कारण राजकुमार बहुत ज़िद्दी हो गया था , और अकारण ही जिद करता रहता था ,साथ ही कोई दोस्त न होने के कारण बहुत उदास भी रहता था । उसकी उदासी राजा से देखी ना जाती , और वह किसी तरह भी अपने लाडले बेटे की उदासी दूर करना चाहता था ,एक बार किसी विशेष काम के लिए राजा को विदेश जाना पड़ा ,उसने राजकुमार से पूछा :”मेरे प्यारे बेटे तुम्हे क्या चाहिए?
बेटे ने कहा :"पिताजी मेरे पास ढेरो खिलौने है पर वे सब किसी काम के नहीं एक बोलने वाली गुडिया चाहिए . और ज़िद्दी स्वर में बोला :-“यदि मुझे आपने बोलनेवाली गुड़िया मुझे जल्दी ना ला कर दी तो मैं खाना पीना सब छोड़ दूंगा "
बेचारा राजा पहले तो सोच में पड़ गया की भला बोलनेवाली गुड़िया कहा मिलेगी फिर उसने राज्य में मुनादी करवा दिया की :-",जो मेरे बेटे को बोलने वाली गुड़िया ला के देगा उसे मैं मुँह माँगा इनाम दूंगा ,सब लोग खोज में लग गए की भला राजकुमार के लिए बोलनेवाली गुड़िया कहा मिलेगी ?
फिर एक दिन राजा के दरबार में सिपाही ने आ कर बताया की :"महाराज एक भिखारिन बाहर खड़ी है और कह रही है की वह राजकुमार के लिए बोलनेवाली गुड़िया ला सकती है। "
राजा ने तुरंत आदेश दिया : जाओ तुरंत उसे आदर से अंदर लाओ "
सिपाही :"जी महाराज,"
कह कर बाहर चला गया और बुढ़िया को ले अंदर आ गया , बुढ़िया का चेहरा बहुत ही भयंकर था , और कपड़े फटे हुए थे शरीर से आने वाली बदबू से पूरे दरबारियों का सांस लेना भी मुश्किल हो गया ,
फिर भी राजा ने आदर सहित बुढ़िया को बैठने का स्थान दिया और बोला: "बोलो माँ क्या तुम्हारे पास बोलने वाली गुड़िया है?"
बुढ़िया बोली: "राजा तुम बहुत दयालु हो और सभी का आदर भी करते हो ,मैं तुम्हे बोलनेवाली गुड़िया दे सकती हूँ ,पर इसके लिए राज्य के किसी एक समझदार युवती की बलि देनी होगी यदि तुम तैयार हो तो मैं ये काम आज ही कर सकती हूँ।"
राजा अपनी प्रजा को भी अपने बच्चो की भांति ही प्यार करता था ,वो सोच में पड़ गया की, भला राजकुमार के लिए किसी की जान लेना कहाँ तक उचित है ? पर राजा की प्रजा भी राजा और राजकुमार को बहुत प्यार करती थी इसलिए मंत्री का बेटी स्वयं राजकुमार के लिए बलि देने को तैयार हो गयी ,और राजा के बहुत मना करने पर भी ना मानी सो राजा को ही मानना पड़ा ,भिखारिन मंत्री की बेटी को ले कर चली गयी और कुछ समय बाद हाथ में एक खूबसूरत सी दिखनेवाली गुड़िया को ले कर आ गयी।
राजा को देखते ही गुड़िया बोली : प्रणाम महाराज मैं राजकुमार की गुड़िया हूँ , दया कर मुझे राजकुमार के पास पंहुचा दे।
राजा बहुत खुश हुआ और गुड़िया को राजकुमार के पास पंहुचा दिया गया ,अब राजकुमार बहुत खुश रहने लगा सोते जागते ,खाते पीते ,रोते हँसते अब उसे गुड़िया के सिवा किसी का होश ना रहता वो बहुत खुश रहता ,देखते देखते राजकुमार विवाह के योग्य हो गया , और राजा उसके लिए वधू खोजने लगा ,पर राजकुमार की एक ही शर्त थी पहले वह अपनी गुड़िया का विवाह कर के ही अपना विवाह करना चाहता था ,अब भला बोलने वाला गुड्डा कहा से मिलता ?
फिर बूढी भिखारिन की खोज हुयी और वो मिल भी गयी उसने हँसते हुए कहा: ठीक है राजन तुम्हे बोलने वाला गुड्डा भी मिल जायेगा और विवाह भी हो जायेगा ,पर ये विवाह राजकुमार नहीं देख सकता ,और राजकुमार को इतने दिन मेरे घर रहना होगा राजकुमार मान गया ।
बुढ़िया राजकुमारी को ले अपने घर गयी और कुछ ही मिनटो में खूबसूरत बोलनेवाला गुड्डा ली के आ गयी और शीघ्र ही रीतिरिवाज़ के अनुसार उनकी शादी भी करवा दी गयी।
अब राजा ने सोचा की राजकुमार वापस आ जाएगा पर वो नहीं आया ,अब राजा बहुत परेशां हुआ और बूढी भिखारिन से दया की भीख मांगने लगा ,
भिखारन तुरंत ही परी के रूप में आ गयी और बोली: राजन मैं तुम्हारी परीक्षा ले रही थी ,मंत्री की बेटी ही बोलनेवाली गुड़िया है ,और राजकुमार का गुड्डे के रूप में गुड़िया से विवाह भी हो चूका है ,पर राजकुमार की इस तरह की ज़िद के कारण अब राजकुमार को गुड्डे का जीवन बिताना होगा और मंत्री की पुत्री को गुड़िया का और जब इनके बच्चे होंगे तो ये अपने पहले वाले रूप में आएंगे “
और गायब हो गयी ,समय के साथ उनका एक पुत्र हुआ और वे वापस अपने रूप में आ गए और राजकुमार ने कभी ज़िद न करने की प्रतिज्ञा की और सुख से रहने लगे।
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